रायपुर: वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक नई पहल की जा रही है। कबीरधाम जिले में स्थित ऐतिहासिक और प्राकृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भोरमदेव अभ्यारण्य में जल्द ही पर्यटकों के लिए जंगल सफारी की शुरुआत की जाएगी। इस योजना से राज्य में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण के प्रति जनजागरूकता भी बढ़ेगी।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डे के मार्गदर्शन में तैयार इस परियोजना के तहत करीब 34 किलोमीटर लंबा सफारी रूट विकसित किया गया है। सफारी के दौरान पर्यटक गौर, चीतल, सांभर, भालू और जंगली सुअर जैसे वन्यप्राणियों को उनके प्राकृतिक आवास में देख सकेंगे।
इस जंगल सफारी की खास पहचान सकरी नदी मार्ग होगी, जहां सफारी के दौरान लगभग 17 बार नदी पार करने का रोमांचक अनुभव मिलेगा। यह मार्ग मैकल पर्वतमाला के सघन वनों से होकर गुजरता है, जो प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए यादगार अनुभव प्रदान करेगा।
स्थानीय लोगों को मिलेंगे रोजगार के अवसर
वन विभाग द्वारा इस परियोजना में स्थानीय सहभागिता को प्राथमिकता दी गई है। सफारी वाहनों का संचालन वन प्रबंधन समिति थंवरझोल द्वारा किया जाएगा, जिससे स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
वन विभाग ने सफारी के सुरक्षित और सुचारु संचालन के लिए सभी आवश्यक तैयारियाँ लगभग पूरी कर ली हैं। जंगल सफारी शुरू होने के बाद भोरमदेव आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक अब ‘छत्तीसगढ़ का खजुराहो’ कहे जाने वाले ऐतिहासिक मंदिरों के दर्शन के साथ-साथ वन्यजीवन के रोमांच का भी आनंद उठा सकेंगे।
Author: Deepak Mittal










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