पर्यटकों का स्वर्ग बना जशपुर, नई पर्यटन नीति से छत्तीसगढ़ को मिलेगा राष्ट्रीय पहचान

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जशपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने नई पर्यटन नीति के तहत बड़े बदलाव किए हैं। छुपे हुए, अनदेखे और रोमांच से भरपूर पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार के लिए अब पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल को अपनाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि छत्तीसगढ़ को देश के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख और आकर्षक पर्यटन हब के रूप में स्थापित किया जाए। इसी कड़ी में पर्यटन मंडल भी सरकार के निर्देशानुसार विस्तार और विकास योजनाओं पर लगातार काम कर रहा है।

साय सरकार द्वारा तैयार की जा रही नई पर्यटन नीति में पर्यटन स्थलों के विकास, संचालन और आधुनिक सुविधाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है। जशपुर जिला इस नीति का प्रमुख केंद्र बनकर उभर रहा है। सड़क मार्ग से जुड़े जशपुर तक पर्यटक झारखंड की राजधानी रांची से हवाई, रेल और बस सेवाओं के माध्यम से आसानी से पहुंच सकते हैं। वहीं ओडिशा के झारसुगुड़ा से भी जशपुर की कनेक्टिविटी बेहतर है। निजी टैक्सी या स्वयं के वाहन से भी यहां पहुंचना आसान है।

छत्तीसगढ़ के उत्तरी भाग में स्थित जशपुर को प्रकृति, संस्कृति और रोमांच का अनोखा संगम माना जाता है। हरियाली से घिरे चाय बागान, ठंडी जलवायु, जलप्रपात, पहाड़ और आदिवासी संस्कृति जशपुर को शहरी भागदौड़ से दूर सुकून की तलाश करने वालों के लिए आदर्श स्थल बनाते हैं। यहां रॉक क्लाइम्बिंग, ट्रैकिंग, जंगल वॉक, योग-ध्यान और आदिवासी जीवनशैली को करीब से देखने का अवसर मिलता है।

जशपुर में पर्यटकों के लिए सरना एथनिक रिजॉर्ट जैसे प्रयासों के माध्यम से विशेष अनुभव उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जहां स्थानीय आदिवासी समुदाय द्वारा आत्मीय स्वागत, अलाव के साथ सांस्कृतिक सत्र, पारंपरिक भोजन, योग-ध्यान, आदिवासी नृत्य, स्टार गेजिंग, फार्म वॉक और साइलेंट जंगल वॉक जैसी गतिविधियां कराई जाती हैं।

पर्यटन स्थलों की बात करें तो जशपुर जिले में दमेरा, देशदेखा, चाय बागान, सोगड़ा आश्रम, रानीदाह, राजपुरी, बगीचा विकासखंड की कैलाश गुफा, खुडियारानी, दनगरी, मकरभंजा और कुनकुरी विकासखंड में एशिया का दूसरा सबसे बड़ा चर्च, मधेश्वर पहाड़, मयाली नेचर कैंप जैसे प्रमुख आकर्षण शामिल हैं। मधेश्वर पहाड़ को ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ में विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में दर्ज किया गया है। इसके धार्मिक और पर्यटन विकास के लिए केंद्र सरकार से 10 करोड़ रुपये की राशि भी स्वीकृत हुई है।

नई पर्यटन नीति के तहत ईको-टूरिज्म, एथनिक (आदिवासी), एडवेंचर और वेलनेस टूरिज्म को प्राथमिकता दी गई है। जशपुर और बस्तर अंचल में टूरिज्म सर्किट विकसित किए जा रहे हैं, जिससे पर्यटन स्थलों की आपसी कनेक्टिविटी मजबूत होगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थलों का प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है।

धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक पर्यटन की दृष्टि से भी छत्तीसगढ़ समृद्ध है। राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयागराज कहा जाता है, सिरपुर, भोरमदेव, डोंगरगढ़, चंदखुरी, शिवरीनारायण, बस्तर का चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी नेशनल पार्क, मैनपाट जैसे स्थल पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।

पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि नई नीति और सरकारी प्रयासों से जशपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान मिलेगी और स्थानीय लोगों को रोजगार व आर्थिक लाभ भी प्राप्त होगा।

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Author: Deepak Mittal

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