
प्रकृति का एक अपना ही नियम होता है। ग्रीष्म ऋतु की तपन को समाप्त करके वर्षा ऋतु ने जैसे अपने आगोश मे धरती को समा कर अद्भुत श्रृंगार किया हो चारों तरफ हरियाली और पक्षियों की चहचहाट कहीं ना कहीं श्रद्धालुओं के मन को मानो अपनी ओर खींच रही है।
यहां प्रकृति स्वरूप में मां पार्वती का श्रगार है इसलिए श्रावण मास भगवान शिव को प्रिय है ऐसा ही दृश्य पाडव कालीन हिमालेश्वर धाम मोरटाकेवड़ी पर श्रावण मास के तीसरे सोमवार पर देखने को मिला जहां पर बाबा की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी हर कोई भक्त शिव की भक्ति में लीन नजर आया क्योंकि बाबा महाकाल को जो भी भक्त भक्ति के साथ में जल और बिलपत्र अर्पण करते हैं .



बाबा महाकाल की कृपा उस भक्त पर हो जाती है वैसे तो पूरा श्रावण मास शिव की भक्ति के लिए विशेष रहता है परंतु श्रावण मास में भी सोमवार का विशेष महत्व शास्त्रों में बताया है इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है आज कन्या भोज के अवसर पर क्षेत्रीय विधायक घनश्याम चंद्रवंशी के साथ पोलायकला तहसीलदार सोनम शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि इस कार्यक्रम में सम्मिलित हुए
कन्या भोज के साथ विशाल भंडारा

लगातार महाकाल सेवा समिति के द्वारा विगत कहीं वर्षों से कन्या भोज के साथ में विशाल भंडारे का आयोजन ग्रामीणों के सहयोग से प्रतिवर्ष किया जाता है जिसमें सभी विधालय से 1000 कन्याओं के साथ में आसपास के गांव के श्रद्धालु इस भंडारे में सम्मिलित होते हैं इस वर्ष भी समिति के द्वारा कन्या भोज के साथ विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया सनातन धर्म में कन्या पूजन के साथ-साथ कन्या भोज का विशेष महत्व रहता है भंडारे के पश्चात बाबा हिमालेश्वर पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले जहां भक्तों के द्वारा जगह जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया
महिला मडंल ने निकाली कलशयात्रा
महिला मंडल के द्वारा ग्राम के राम मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकली गई जिसमें आगे आगे ढोल डीजे की धुन पर महिला नृत्य करती हुई नजर आई वहीं पर पूरे मार्ग मे जय बोल बम के जयकारो से गुंजायमन हो गया कलश यात्रा बस स्टैंड मेन मार्केट शक्ति चौक राधाकृष्ण मंदिर बाडी चौक होते हुए 4 किलोमीटर का पैदल मार्ग तय कर बाबा दरबार पहुंचे जहां पर कलश का जल चढ़कर बाबा का जलाभिषेक किया.
प्रशासन को इस मंदिर की और ध्यान देना चाहिए यहां श्रावण मास के अलावा महाशिवरात्रि पर विशाल आयोजन होते हैं। प्रदेश सहित क्षेत्र में यह मंदिर आस्था का केंद्र है । सोमवती शनिचरी अमावस पर क्षेत्र के श्रद्धालु स्नान करने आते हैं यहां घाट निर्माण से लेकर श्रद्धालुओं को ठहरने की व्यवस्था होना चाहिए

दौलतसिह दागी
हिमालेश्वर समिति कोषाध्याक्ष
Author: Deepak Mittal










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