Iran का 11 अमेरिकी ठिकानों पर हमला, कम्युनिकेशन सिस्टम निशाने पर; ऑपरेशन्स प्रभावित

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

वॉशिंगटन: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Iran ने कथित तौर पर मध्य-पूर्व में स्थित कम से कम 11 अमेरिकी सैन्य ठिकानों के कम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कार्रवाई हालिया U.S.-इज़राइल संयुक्त हमलों के जवाब में की गई, जिनका उद्देश्य ईरान के रणनीतिक ठिकानों को टारगेट करना था।

Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) पर ड्रोन झुंड और बैलिस्टिक मिसाइलों के जरिए सैटेलाइट अपलिंक टर्मिनल, अर्ली-वॉर्निंग रडार और डिजिटल कमांड लिंक को निशाना बनाने का आरोप है। बताया जा रहा है कि इस रणनीति का मकसद अमेरिकी एयर कैंपेन “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के समन्वय को बाधित करना था।

इन ठिकानों को बनाया गया निशाना

डिफेंस सूत्रों और क्षेत्रीय मॉनिटरिंग एजेंसियों के अनुसार, हमलों का प्रभाव निम्न प्रमुख ठिकानों पर देखा गया:

  • Camp Arifjan (कुवैत): लॉजिस्टिक्स हब पर मिसाइल हमला, अमेरिकी जवानों के हताहत होने की खबर।

  • Al Ali Al Salem Air Base: कम्युनिकेशन सिस्टम को नुकसान।

  • Naval Support Activity Bahrain: अमेरिकी 5th फ्लीट मुख्यालय के कमांड सेंटर को टारगेट।

  • Isa Air Base: सैटेलाइट अपलिंक सुविधाओं पर ड्रोन हमला।

  • Al Dhafra Air Base: फाइटर जेट और सर्विलांस ऑपरेशन्स प्रभावित।

  • Jebel Ali Port: नेवी लॉजिस्टिक्स और कम्युनिकेशन नोड्स को क्षति।

  • Prince Sultan Air Base: इंटरसेप्टर लॉन्च, मलबे से इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम प्रभावित।

  • Al Asad Airbase: टैक्टिकल ऑपरेशन सेंटर पर मिसाइल हमले।

इसके अलावा ओमान के दुकम और सलालाह पोर्ट तथा रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास परिसर पर भी ड्रोन हमलों की खबर है।

रणनीतिक असर: ‘किल चेन’ को तोड़ने की कोशिश

सैन्य विश्लेषकों के मुताबिक, ईरान ने बैरक या रनवे के बजाय कम्युनिकेशन नोड्स को निशाना बनाकर “असिमेट्रिक वारफेयर” की रणनीति अपनाई है। आधुनिक अमेरिकी सैन्य प्रणाली तेज़ “किल चेन” मॉडल पर आधारित है, जिसमें रडार और सेंसर से मिले डेटा को तुरंत एयरक्राफ्ट और मिसाइल यूनिट्स तक पहुंचाया जाता है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कतर और यूएई स्थित रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचाकर अमेरिकी मिसाइल डिफेंस नेटवर्क में सेंध लगाने की कोशिश की गई है।

क्षेत्रीय तनाव में इजाफा

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास बढ़ती गतिविधियों और तेल टैंकर मूवमेंट पर असर से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में यह टकराव व्यापक संघर्ष का रूप ले सकता है।

अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा है कि हालात पर नजर रखी जा रही है और क्षेत्र में तैनात बलों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कदम उठाए गए हैं।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Comment

Leave a Comment