नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब देश के हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर भी दिखाई देने लगा है। Iran और Israel के बीच बढ़ते तनाव तथा वैश्विक हालात के बीच कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित होने लगी है। गैस की आपूर्ति अचानक रुकने से कई शहरों के बड़े होटल और रेस्टोरेंट संचालन में गंभीर दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।
गैस न मिलने के कारण कुछ होटलों को मजबूर होकर लकड़ी के चूल्हों का सहारा लेना पड़ रहा है, ताकि भोजन तैयार करने का काम जारी रखा जा सके। कई जगहों पर होटल कर्मचारियों को आसपास के इलाकों से लकड़ी इकट्ठा करते हुए भी देखा गया है। यह व्यवस्था खास तौर पर होटल में ठहरे मेहमानों और कर्मचारियों के लिए भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की जा रही है।
पुडुचेरी में मेनू में बदलाव
Puducherry में भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी का असर साफ दिखाई दे रहा है। यहां के कई होटलों ने ईंधन की खपत कम करने के लिए अपने मेनू में बदलाव करना शुरू कर दिया है। एक होटल संचालक के अनुसार अब शाम चार बजे से सात बजे के बीच केवल चाय, कॉफी और जूस ही परोसे जा रहे हैं, जबकि पहले इसी समय स्नैक्स भी उपलब्ध रहते थे।
एक गैस वितरक के मुताबिक केंद्र सरकार ने फिलहाल एलपीजी की आपूर्ति प्राथमिकता के आधार पर घरेलू उपभोक्ताओं को देने का निर्देश दिया है। इसी कारण वाणिज्यिक सिलेंडरों की सप्लाई अस्थायी रूप से रोक दी गई है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट उद्योग प्रभावित हो रहा है।
भोपाल में 48 घंटे का ही स्टॉक
Bhopal में भी कमर्शियल गैस सिलेंडर की आपूर्ति पर लगे प्रतिबंध का असर आने वाले दिनों में देखने को मिल सकता है। होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष Tejkulpal Singh Pali ने बताया कि फिलहाल शहर के होटलों और रेस्टोरेंट के पास करीब 48 घंटे का ही गैस स्टॉक बचा है।
उन्होंने कहा कि यदि अगले दो दिनों के भीतर आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो कई होटल और रेस्टोरेंट को अपना संचालन बंद करना पड़ सकता है। भोपाल में रोजाना करीब 1000 कमर्शियल गैस सिलेंडरों की खपत होती है, इसलिए सप्लाई पर रोक का सीधा असर कारोबार पर पड़ेगा।
पाली के मुताबिक नियमों के तहत होटल और रेस्टोरेंट संचालक अधिकतम दो दिन का ही गैस स्टॉक रख सकते हैं। ऐसे में यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो कारोबार प्रभावित होगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि यदि गैस की आपूर्ति जल्द संभव नहीं है, तो होटल-रेस्टोरेंट को वैकल्पिक ईंधन जैसे कोयले के इस्तेमाल की अनुमति दी जाए, ताकि कारोबार को कुछ राहत मिल सके।
Author: Deepak Mittal










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