Indian Auto Industry: ऑटो पा‌र्ट्स इंडस्ट्री पर चौतरफा मार, क्या केंद्र सरकार से मिलेगी राहत?

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लुधियाना। देश का ऑटो पा‌र्ट्स उद्योग रोजगार को लेकर अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाता है। लगभग 57 अरब डॉलर के आसपास का कुल घरेलू आटो उपकरण उद्योग चौतरफा संकट से गुजर रहा है।

बढ़ती लागत और टैक्स की मार के बीच संसाधनों की कमी के कारण ऑटो पा‌र्ट्स उद्योग बाजार की चुनौतियों का मुकाबला नहीं कर पा रहा है।

ऊपर से केंद्र सरकार की ओर से स्टील पर 25 प्रतिशत सेफगार्ड ड्यूटी लगाए जाने के प्रस्ताव से उद्योग चिंता में पड़ गया है, क्योंकि इस उद्योग का कच्चा माल स्टील है। ऐसे में ऑटो पा‌र्ट्स उद्योग को आगामी आम बजट में केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से काफी उम्मीदें हैं।

उद्यमियों का कहना है कि केंद्र सरकार स्टील की कीमतों को स्थिर रखने के उपाय करे और स्टील नियामक प्राधिकरण बनाई जाए, जिसकी मांग लंबे समय से की जा रही है। सरकार स्टील की कीमतें कम से कम तीन महीने तक स्थिर रखे ताकि वह उत्पादन को लेकर बेहतर प्लानिंग की जा सके।

कंपनियां रोजाना नए मॉडल ला रही हैं। उनमें कम से कम पांच साल तक नए पा‌र्ट्स की जरूरत नहीं पड़ती। इसलिए रिप्लेसमेंट मार्केट 60 प्रतिशत खत्म हो गया है। इसका असर भी आटो पा‌र्ट्स उद्योग पर हो रहा है। सरकार को पा‌र्ट्स पर जीएसटी 12 प्रतिशत करनी चाहिए। प्री-बजट मेमोरेंडम में इन बातों का उल्लेख अपेक्स चैंबर करेगा।

रजनीश आहूजा, प्रेसिडेंट, अपेक्स चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज

ई-वाहन इंडस्ट्री ने बढाई चिंता

भले ही केंद्र सरकार देश में इलेक्ट्रिक वाहन (ई-वाहन) बढ़ाने की कोशिश कर रही है, लेकिन इससे ऑटो पा‌र्ट्स निर्माताओं के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो रही हैं। उनका मानना है कि ई-वाहनों के आने से आटो पा‌र्ट्स उद्योग सिमट जाएगा। मौजूदा वाहनों के इंजन में दो हजार से अधिक मूविंग पा‌र्ट्स लगते हैं, जबकि ई-वाहन में 20 से अधिक ही मूविंग पा‌र्ट्स लग रहे हैं।

साथ ही, अत्याधुनिक वाहनों में उच्च गुणवत्ता के पुर्जे आने से वैकल्पिक बाजार भी लगातार सिकुड़ रहा है। ऐसे में आटो पा‌र्ट्स उद्यमी भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। पंजाब में आटो पा‌र्ट्स उद्योग से जुड़ी दो हजार से अधिक इकाइयां हैं और इनमें वार्षिक 10 हजार करोड़ से अधिक का कारोबार हो रहा है।

हाल ही में सरकार ने स्टील पर 25 प्रतिशत ड्यूटी लगाने का जो प्रस्ताव रखा है, वह आटो पा‌र्ट्स उद्योग के लिए बड़ा संकट है। केंद्र सरकार को ड्यूटी लगाने से पहले इंडस्ट्री को होने वाले नुकसान पर ध्यान देना चाहिए। इससे ऑटो पा‌र्ट्स उद्योग में लागत बढ़ेगी और यह चिंता का विषय है।

गुरपरगट सिंह काहलों, अध्यक्ष, ऑटो पा‌र्ट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया

प्रतिस्पर्धा में स्थानीय उद्योग टिक नहीं पा रहा

संसाधनों की कमी के कारण ऑटो पा‌र्ट्स उद्योग बाजार की चुनौतियों का मुकाबला नहीं कर पा रहा है। इसके अलावा चीन से आयात हो रहे उत्पादों को लेकर भी चुनौतियां बढ़ रही हैं। 25 प्रतिशत से अधिक पा‌र्ट्स चीन से आयात हो रहे हैं, जबकि 60 प्रतिशत तक आटो एसेसरीज विदेश से आ रही हैं। कीमत की प्रतिस्पर्धा में स्थानीय उद्योग टिक नहीं पा रहे हैं। प्रदेश में ऑटो पा‌र्ट्स सेक्टर की मजबूती के लिए न केवल टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन बल्कि विशेष आर्थिक जोन की भी दरकार है।

ऑटो पा‌र्ट्स उत्पादकों का कहना है कि उन्हें वैश्विक बाजार में जहां कड़ी चुनौतियां मिल रहीं हैं, वहीं बढ़ते आयात के चलते घरेलू मार्केट में भी परेशानियां बढ़ रही हैं। इस घटती हिस्सेदारी को बचाने के लिए विकास एवं संशोधन केंद्र (आरएंडडी सेंटर) सहित तकनीकी अपग्रेडेशन आवश्यक हो गया है।

सरकार से क्या हैं ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री की उम्मीदें?

अगले 10 वर्षों में ऑटोमोबाइल पर टैक्स में कटौती से भारत का आटो उद्योग वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी होगा। इससे बड़े स्तर पर रोजगार सृजन होगा, जिससे अर्थव्यवस्था को लाभ होगा। उद्यमी चाहते हैं कि उनके उत्पादों पर लगने वाला जीएसटी 28 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत किया जाए ताकि वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में डटे रह सकें। उद्योग को सस्ती दर पर कर्ज मुहैया कराने, ईज आफ डूइंग बिजनेस को सही तरीके से प्रोत्साहित करने और उद्योग को जीएसटी रिफंड समय पर मिलने का इंतजाम किया जाए।

देश में ऑटो पा‌र्ट्स उद्योग की स्थिति

  • 57 अरब डॉलर के आसपास है घरेलू ऑटो उपकरण उद्योग का कुल कारोबार।
  • 21.2 अरब डॉलर के ऑटो उपकरणों का होता है निर्यात, 50 लाख लोग कार्यरत हैं।
  • 7.1 प्रतिशत हिस्सेदारी है देश की जीडीपी में आटो उपकरण उद्योग की।
  • 200 अरब डॉलर का हो जाएगा आटो उपकरण उद्योग 2026 तक।

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Author: Deepak Mittal

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