नई दिल्ली: भारत और अरब लीग देशों ने फिलिस्तीन मुद्दे के समाधान के लिए दो-राज्य समाधान का समर्थन करते हुए इज़राइल के साथ-साथ एक संप्रभु और व्यवहार्य फिलिस्तीनी राज्य की वकालत की है। शनिवार को नई दिल्ली में आयोजित दूसरी भारत–अरब विदेश मंत्रियों की बैठक में दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आधार पर अंतरराष्ट्रीय संबंधों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
बैठक के बाद जारी दिल्ली घोषणा में कहा गया कि दोनों पक्ष आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा करते हैं। सीमा पार आतंकवाद पर चिंता जताते हुए सभी देशों से आतंकवादी ढांचे और आतंकवाद के वित्तपोषण को समाप्त करने तथा दोषियों को बिना किसी देरी के न्याय के कटघरे में लाने के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया गया। बैठक में पहलगाम में निर्दोष भारतीयों पर हुए आतंकी हमले की भी तीखी निंदा की गई, वहीं अरब लीग के सदस्य देशों ने आतंकवाद से निपटने में भारत को पूर्ण समर्थन देने की बात दोहराई।
भारत की मेज़बानी में हुई इस अहम बैठक में अरब लीग के 19 सदस्य देशों ने हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान फिलिस्तीन मुद्दे के अलावा बहुपक्षवाद को समर्थन, राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान, आतंकवाद का मुकाबला तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार जैसे विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। दोनों पक्षों ने अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
घोषणा में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय कानून, संबंधित संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों और अरब शांति पहल के अनुरूप मध्य पूर्व में न्यायपूर्ण, व्यापक और स्थायी शांति की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे। दोनों पक्षों ने पिछले वर्ष शर्म अल-शेख शांति शिखर सम्मेलन के परिणामों का स्वागत किया, जिसके तहत गाजा में युद्धविराम समझौता हुआ था। इस प्रक्रिया में मिस्र, कतर और संयुक्त राज्य अमेरिका की भूमिका की सराहना की गई।
बैठक में गाजा पट्टी में मानवीय सहायता की निर्बाध, पर्याप्त और निरंतर पहुंच सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया, ताकि राहत एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों का संचालन सुचारु रूप से जारी रह सके। साथ ही गाजा में राहत, पुनर्बहाली और पुनर्निर्माण के लिए अरब–इस्लामिक योजना को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
भारत और अरब लीग देशों ने ऊर्जा, डिजिटल क्षेत्र, स्वास्थ्य और शिक्षा में सहयोग बढ़ाने का भी संकल्प लिया। इसके अलावा हूती मिलिशिया द्वारा समुद्री नेविगेशन पर किए जा रहे हमलों की निंदा करते हुए बाब अल-मंडाब जलडमरूमध्य, दक्षिणी लाल सागर, अदन की खाड़ी, अरब सागर और हिंद महासागर की सुरक्षा को साझा अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी बताया गया।
दोनों पक्षों ने शांति, समानता और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए रचनात्मक शक्तियों के रूप में कार्य करने और दक्षिण–दक्षिण सहयोग को मजबूत करने के अपने सामूहिक संकल्प की पुष्टि की।
Author: Deepak Mittal










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