एक हादसे में फौरन जेल, दूसरे में खामोशी… क्या रसूखदार का बेटा कानून से ऊपर है?

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बिलासपुर: सकरी थाना क्षेत्र में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। एक बेकाबू केटीएम बाइक ने पैदल चल रही मां-बेटी की जिंदगी छीन ली, तो वहीं दूसरी ओर एक और गंभीर हादसे में रसूखदार व्यवसायी के बेटे पर पुलिस मेहरबान नजर आ रही है। अब सवाल उठ रहा है—क्या कानून सबके लिए बराबर है?

5 जनवरी को 27 खोली निवासी डेनिस मिंज (19) अपनी केटीएम बाइक (OD 10 AS 7268) को तेज रफ्तार और लापरवाही से चला रहा था। इसी दौरान उसने सड़क किनारे पैदल जा रहीं उर्मिला मनहर और उनकी नाबालिग बेटी मान्या मनहर को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयावह थी कि दोनों को गंभीर हालत में सिम्स अस्पताल लाया गया, जहां इलाज के दौरान मां-बेटी ने दम तोड़ दिया।

पुलिस ने इस मामले को सामान्य दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए आरोपी के खिलाफ बीएनएस की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत मामला दर्ज किया। यह धारा गैर-जमानती है। पुलिस ने आरोपी को तत्काल गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया, साथ ही घटना में प्रयुक्त स्पोर्ट्स बाइक भी जब्त कर ली।

लेकिन इसी शहर में एक और हादसा अब पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।
सिविल लाइन थाना क्षेत्र के मिनोचा कॉलोनी के पास तेज रफ्तार कार से व्यवसायी के बेटे ने मॉर्निंग वॉक पर निकले एक बिल्डर को टक्कर मार दी। हादसे में बिल्डर गंभीर रूप से घायल हो गया, लेकिन अब तक आरोपी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई

घायल बिल्डर के परिजनों का आरोप है कि यह केवल हादसा नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई ठोकर थी। वहीं पुलिस पर आरोप लग रहे हैं कि वह रसूख और दबाव में आकर जानबूझकर कार्रवाई में देरी कर रही है

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Author: Deepak Mittal

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