नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ताज़ा घटनाक्रम में ईरान ने दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक Strait of Hormuz (होर्मुज जलडमरूमध्य) को बंद करने का ऐलान किया है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया है कि इस मार्ग से गुजरने वाले किसी भी जहाज को निशाना बनाया जाएगा।
ऊर्जा व्यापार की ‘धड़कन’ है होर्मुज
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला संकरा समुद्री रास्ता है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। अनुमान के मुताबिक, दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत प्रवाह इसी रास्ते से होता है। ऐसे में इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार, ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
शनिवार को मार्ग बंद करने के ऐलान के बाद यह ईरान की ओर से अब तक की सबसे कड़ी चेतावनी मानी जा रही है। वहीं अमेरिका का कहना है कि उसने अभी तक कोई बड़ा सैन्य हमला नहीं किया है। दूसरी ओर ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत के पक्ष में नहीं है।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। यह तेल मुख्य रूप से होर्मुज मार्ग से होकर ही भारत पहुंचता है। यदि यह मार्ग बाधित होता है तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतों पर तत्काल असर पड़ सकता है।
तेल महंगा होने की स्थिति में:
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पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि संभव
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महंगाई दर पर दबाव
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आयात बिल में इजाफा
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चालू खाते के घाटे में बढ़ोतरी
सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा निर्यातक देश भी इसी मार्ग पर निर्भर हैं। ऐसे में तनाव बढ़ने पर वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है, जिसका असर शेयर बाजार और परिवहन लागत पर भी दिखाई देगा।
फंसे भारतीयों को कैसे निकालेगा भारत?
तनाव की स्थिति में खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा बन सकती है। इससे पहले भारत संकटग्रस्त क्षेत्रों से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए विशेष अभियान चला चुका है। उदाहरण के तौर पर यमन संकट के दौरान चलाया गया Operation Sankalp उल्लेखनीय रहा है।
जरूरत पड़ने पर भारतीय नौसेना और वायुसेना को अलर्ट पर रखा जा सकता है। साथ ही खाड़ी देशों के साथ कूटनीतिक स्तर पर समन्वय बढ़ाकर समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी।
कूटनीति और समुद्री सुरक्षा होगी अहम
भारत के ईरान, सऊदी अरब और यूएई के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं। ऐसे में संतुलित कूटनीति, ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण और समुद्री सुरक्षा सहयोग भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था इसकी चपेट में आ सकती है।
Author: Deepak Mittal










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