
मिट्टी डाल नाले को पाटने से पानी में डूबी 100 एकड़ धान की फसल, जमीन दलाल फिर हुआ बेलगाम…..
मुंगेली-ग्राम बिरगॉव जो मुंगेली कलेक्ट्रेट से लगा हुआ गॉव है जहाँ बड़े सरकारी नाले जो मेन रोड़ से लगे है को एक किसान ने छोटा पुलिया डाल कर मिट्टी से पाट दिया है,जिसके चलते आसपास के अन्य किसानों की करीब 100 एकड़ धान की फसल पानी में डूब गई है। ये जमीन ग्राम बिरगॉव के ही किसान से जमीन दलाल लोग अपने माध्यम से दूसरे दलाल के पास बेच दिये है।
बताया जाता है कि इस जमीन को सरकारी नौकरी करने वाले तीन से चार लोग मिलकर जमीन दलाली में लगे हुए है और इस जमीन को खरीदकर सामने के बड़े नाले को पाटकर छोटा पुलिया लगा दिये है जिससे गांव के ही 100 एकड़ जमीन पानी भरने से फसल खराब होने के कगार पर है। जानकारी के अनुसार ग्राम बिरगांव मुंगेली के रहने वाले ब्यासनरण, मुकेश चंद्रनाथ, रामसिंग,चंदन ,दिलीप,संतोष,

मिंकु,विकाश, लखन पाटले,कुंदन बाई, रामकुमार साहू आदि किसानों ने बताया कि पानी के निकासी के लिए बने सरकारी नाले में छोटे पुलिया को मिट्टी डालकर अपने खेतों के सामने को पाट दिया है जिसके चलते वह पानी अन्य किसानों के खेतों में जमा हो रहा है और लगभग 100 एकड़ जमीन के फसल इसके चलते बर्बाद हो रही है,इस नाले में बहुत दूर से अनेको गांव के पानी इस नाले से गुजरती है, और ज्यादा बरसात हुआ तो हमारे गांव की पूरी बस्ती डूब जाएगी।
वर्तमान में ग्राम के किसानों के द्वारा उस संबंधित किसान को कारण बताने पर कुछ मिट्टी को खुदाई करवाकर नाले के मिट्टी को मेंन रोड़ के ऊपर रख दिया गया है, जिससे आने जाने वाले राहगीरों को मुश्किलो का सामना कर गुजरना पड़ रहा है कुछ लोगो की वहा पर एक्सीडेंट की भी खबर मिली है।मिट्टी से फिसल कर लोग गिर रहे है और बड़े हादसे की भी संभावनाएं व्यक्त की जा रही है ।ऐसे स्थिति में उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिला प्रशासन को भी अवगत किया गया है।
गौर रहे कि गत 07 मार्च 2024 को एक वेब पोर्टल में खबर प्रकाशित करके वीडियो के साथ प्रशासन को जागरूक किया गया था परन्तु प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यानाकर्षण नही दिया।
जब इस तरीके के समस्या की जानकारी पहले पता चलती है तो उस समय में ध्यान नहीं दिया जाता है जब नदी नाले को कोई पाट देता है फिर बरसात के समय मे समस्या आती है तो बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षा प्रदान देने पर ध्यान देते है जिससे सरकार की धन की क्षति होती है अलग से जन धन की भी हानि होती है प्रशासन के लोग आते और चले जाते है इसका खामयाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।
राजस्व विभाग ने भी इस नाले की ओर अबतलक कोई ध्यान नहीं दिया। जिस कारण मानसून की पहली बारिश के कारण कई किसानों की लगभग 100 एकड़ धान की फसल पानी में डूब गई है।
समूह किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि वह नींद से जागकर आरोपी किसान की ओर से बंद किए नाले को खुलवाकर पानी का निकास करवाए ताकि किसानों के खेतों में खड़ा पानी निकल सके व डूबी फसल को बचाया जा सके। उन्होंने बताया कि अगर जल्द ही ऐसा न किया गया तो किसानों को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से करोड़ों रुपए मुआवजा लेना पड़ेगा जिसका जिम्मेदार केवल जिला प्रशासन होगा।
Author: Deepak Mittal










Total Users : 8168829
Total views : 8196595