भारतीय अंतरिक्ष के जनक – डॉ॰ विक्रम अंबालाल साराभाई

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

भारतीय अंतरिक्ष के जनक – डॉ॰ विक्रम अंबालाल साराभाई

ताराचंद साहू बालोद की कलम से,,,

विक्रम साराभाई को न केवल भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में उनके अग्रणी कार्यों के लिए जाना जाता है। उन्होंने भारत को अंतरिक्ष की दौड़ में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया। डॉ॰ विक्रम साराभाई का अहमदाबाद में 12 अगस्त 1919 को एक समृद्ध जैन परिवार में जन्म हुआ।गुजरात कॉलेज से इंटरमीडिएट तक विज्ञान की शिक्षा पूरी करने के बाद वे 1937 में कैम्ब्रिज (इंग्लैंड) चले गए जहां 1940 में प्राकृतिक विज्ञान में ट्राइपोज डिग्री प्राप्त की। द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू होने पर वे भारत लौट आए और बंगलौर स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान में नौकरी करने लगे। जहां वह महान वैज्ञानिक चन्द्रशेखर वेंकटरमन के निरीक्षण में ब्रह्माण्ड किरणों पर अनुसन्धान कर भारत में उन्होंने अंतर-भूमंडलीय अंतरिक्ष, सौर-भूमध्यरेखीय संबंध और भू-चुम्बकत्व पर अध्ययन किया।

वर्ष 1940-45 की अवधि के दौरान कॉस्मिक रेज़ अपना पहला अनुसन्धान लेख “टाइम डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ कास्मिक रेज़” भारतीय विज्ञान अकादमी की कार्यविवरणिका में प्रकाशित किया। 1947 में उष्णकटीबंधीय अक्षांक्ष (ट्रॉपीकल लैटीच्यूड्स) में कॉस्मिक रे पर अपने शोधग्रंथ के लिए कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में उन्हें डाक्ट्ररेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। डॉ॰ साराभाई एक प्रवर्तक वैज्ञानिक, भविष्य द्रष्टा, औद्योगिक प्रबंधक और देश के आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक उत्थान निर्माता का अद्भुत संयोजन था। डॉ॰ साराभाई युवा वर्ग की क्षमताओं में अत्यधिक विश्वास रखते थे। यही कारण कि वे उन्हें अवसर और स्वतंत्रता प्रदान करने के लिए सदा तैयार रहते थे। डॉ॰ साराभाई एक महान संस्थान निर्माता भी थे उनके द्वारा स्थापित कुछ सर्वाधिक जानी-मानी संस्थाओं के नाम – भौतिकी अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल), अहमदाबाद; भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) अहमदाबाद; सामुदायिक विज्ञान केन्द्र; अहमदाबाद, दर्पण अकादमी फॉर परफार्मिंग आट्र्स, अहमदाबाद; विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र, तिरुवनन्तपुरम; अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, अहमदाबाद; फास्टर ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (एफबीटीआर) कलपक्कम; वैरीएबल एनर्जी साईक्लोट्रोन प्रोजक्ट, कोलकाता; भारतीय इलेक्ट्रानिक निगम लिमिटेड (ईसीआईएल) हैदराबाद और भारतीय यूरेनियम निगम लिमिटेड (यूसीआईएल) जादुगुडा, बिहार।

डॉ॰ होमी जे. भाभा की जनवरी, 1966 में मृत्यु के बाद डॉ॰ साराभाई को परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष का कार्यभार संभालने को कहा गया। साराभाई ने सामाजिक और आर्थिक विकास की विभिन्न गतिविधियों के लिए अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी में छिपी हुई व्यापक क्षमताओं को पहचान लिया था। उन्होंने भारत में उपग्रह टेलीविजन प्रसारण के विकास में भी अग्रणी भूमिका निभाई।साराभाई देश में विज्ञान की शिक्षा की स्थिति के बारे में बहुत चिन्तित थे। इसकी स्थिति में सुधार लाने के लिए उन्होंने सामुदायिक विज्ञान केन्द्र की स्थापना की थी।तिरुवनन्तपुरम (केरल) के कोवलम में 30 दिसम्बर 1971 को डॉ॰ साराभाई का देहान्त हो गया। जिससे उनके सम्मान में तिरुवनंतपुरम में स्थापित थुम्बा इक्वेटोरियल रॉकेट लाँचिंग स्टेशन (टीईआरएलएस) और सम्बद्ध अंतरिक्ष संस्थाओं का नाम बदल कर विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र रखा गया। साथ ही भारतीय डाक विभाग द्वारा उनकी मृत्यु की पहली बरसी पर 1972 में एक डाक टिकट जारी किया गया। सृजनशील वैज्ञानि सफल और दूरदर्शी उद्योगपति, उच्च कोटि के प्रवर्तक, महान संस्था निर्माता, अलग किस्म के शिक्षाविद, कला पारखी, सामाजिक परिवर्तन अनेक विशेषताएं उनके व्यक्तित्व में समाहित थीं।

भारत में हर वर्ष 12 अगस्त को डॉ. विक्रम साराभाई की जयंती मनाई, जिन्होंने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में अग्रणी भूमिका निभाई और विभिन्न क्षेत्रों में प्रमुख संस्थानों की स्थापना की। वर्ष 1919 में अहमदाबाद में जन्मे डॉ. विक्रम साराभाई भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के गुरु थे। साराभाई के प्रयासों से वर्ष 1962 में INCOSPAR का निर्माण हुआ, जो बाद में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) बन गया और जिसने फ्राँस से भारत में वाइकिंग इंजन प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण की सुविधा प्रदान की। नासा के साथ उनके संपर्क ने वर्ष 1975 में सैटेलाइट इंस्ट्रक्शनल टीवी एक्सपेरिमेंट (SITE) का मार्ग प्रशस्त किया, जिसने भारत में केबल टीवी की शुरुआत की। परिवर्तनीय ऊर्जा साइक्लोट्रॉन परियोजना या वीईसीसी कलकत्ता में स्थित है और इसकी स्थापना 1972 में हुई थी। वीईसीसी बुनियादी और अनुप्रयुक्त परमाणु विज्ञान और परमाणु कण त्वरक के विकास में अनुसंधान करता है। अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (एसएसी), अहमदाबाद की स्थापना 1972 में हुई थी। अंतरिक्ष उपयोग केंद्र ने इसरो के विजन और मिशन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ईसीआईएल), हैदराबाद की स्थापना 1967 में इलेक्ट्रॉनिक्स में एक मजबूत स्वदेशी आधार बनाने के लिए की गई थी।

तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार मे INCOSPAR का स्थान इसरो ने ले लिया। बाद में 1972 में, भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विकास की देखरेख के लिए एक अंतरिक्ष आयोग और अंतरिक्ष विभाग (DoS) की स्थापना की गई।1979 में एसएलवी के पहले प्रक्षेपण में रोहिणी प्रौद्योगिकी पेलोड था, लेकिन यह उपग्रह को उसकी वांछित कक्षा में स्थापित नहीं कर सका । इसके बाद 1980 में रोहिणी सीरीज- I उपग्रह को ले जाने में सफल प्रक्षेपण हुआ , आरएस-1 कक्षा में पहुंचने वाला तीसरा भारतीय उपग्रह था। वर्ष 1990 के दशक में पीएसएलवी का आगमन भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक बड़ी सफलता था। इसरो ने 6 मई 1992-1994 के बीच अमेरिकी सरकार के प्रतिबंधों के अधीन था। कारगिल युद्ध के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) तकनीक के साथ भारत की मदद करने से इनकार करने के बाद , इसरो को अपना स्वयं का उपग्रह नेविगेशन सिस्टम आईआरएनएसएस विकसित किया। वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने वैज्ञानिकों से चंद्रमा पर मानव उतारने की तकनीक विकसित करने का आग्रह किया और चंद्र, ग्रहीय और मानवयुक्त मिशनों के कार्यक्रम शुरू किए गए। इसरो ने 2008 में पीएसएलवी के ज़रिए चंद्रयान-1 लॉन्च किया , जो कथित तौर पर चंद्रमा पर पानी की मौजूदगी की पुष्टि करने वाला पहला यान था। 23 अगस्त 2023 को, भारत ने एक अलौकिक निकाय पर अपनी पहली नरम लैंडिंग हासिल की और चंद्र दक्षिणी ध्रुव के पास अंतरिक्ष यान को सफलतापूर्वक उतारने वाला पहला राष्ट्र बन गया। इसके बाद भारत ने 2 सितंबर 2023 को पीएसएलवी के माध्यम से अपना पहला सौर जांच यान, आदित्य-एल1 , सफलतापूर्वक लॉन्च किया।30 दिसंबर 2024 को, इसरो ने दो छोटे उपग्रहों का उपयोग करके अंतरिक्ष यान मिलन , डॉकिंग और अनडॉकिंग में अग्रणी भूमिका निभाते हुए , स्पैडेक्स मिशन का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। 16 जनवरी 2025 को, इसरो टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क के मिशन ऑपरेशंस कॉम्प्लेक्स ने सत्यापित किया कि डॉकिंग प्रक्रिया सफल रही। भारत, अमेरिका, रूस और चीन के बाद सफल अंतरिक्ष डॉकिंग हासिल करने वाला चौथा देश बन गया। 2025 की शुरुआत में इसरो ने गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन के लिए अंतिम निरस्त परीक्षण पूरा कर लिया , जिसे 2027 की शुरुआत में लॉन्च किया जाना था।

एक विकासशील राष्ट्र के रूप में भारत के लिए अंतरिक्ष कार्यक्रम के महत्व के विषय पर, INCOSPAR के अध्यक्ष के रूप में विक्रम साराभाई ने 1969 में कहा था हमारे लिए, उद्देश्य की कोई अस्पष्टता नहीं है। चंद्रमा या ग्रहों की खोज या मानवयुक्त अंतरिक्ष-उड़ान में आर्थिक रूप से उन्नत देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का हमारा कोई सपना नहीं है। लेकिन हम आश्वस्त हैं कि यदि हमें राष्ट्रीय स्तर पर और राष्ट्रों के समुदाय में एक सार्थक भूमिका निभानी है, तो हमें मानव और समाज की वास्तविक समस्याओं, जो हमारे देश में मौजूद हैं, के समाधान हेतु उन्नत तकनीकों के अनुप्रयोग में किसी से पीछे नहीं रहना चाहिए। भारत के पूर्व राष्ट्रपति और डीआरडीओ के अध्यक्ष एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा अदूरदर्शी दृष्टि वाले बहुत से लोगों ने एक नव-स्वतंत्र राष्ट्र में, जिसे अपनी आबादी का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा था, अंतरिक्ष गतिविधियों की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए। लेकिन न तो प्रधानमंत्री नेहरू और न ही प्रो. साराभाई के उद्देश्य में कोई अस्पष्टता थी। उनका दृष्टिकोण बिल्कुल स्पष्ट था यदि भारतीयों को राष्ट्रों के समुदाय में एक सार्थक भूमिका निभानी है, तो उन्हें अपने जीवन की वास्तविक समस्याओं के समाधान में उन्नत तकनीकों के अनुप्रयोग में किसी से पीछे नहीं रहना होगा। उनका इरादा इसे केवल अपनी शक्ति प्रदर्शित करने के साधन के रूप में इस्तेमाल करने का नहीं था।

इसरो (ISRO) का आज हमारे जीवन में बहुत महत्व है। यह न केवल भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को चलाता है, बल्कि यह संचार, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन, शिक्षा और कृषि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसरो के उपग्रह और प्रौद्योगिकियां हमारे दैनिक जीवन को कई तरह से प्रभावित करती हैं, जिससे जीवन आसान और अधिक सुरक्षित बनता है। संक्षेप में, इसरो एक बहुआयामी संगठन है जो भारत के विकास और कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।इसरो का आदर्श वाक्य “मानव जाति की सेवा में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी” है यह आदर्श वाक्य इसरो के मिशन और उद्देश्य को दर्शाता है, जो कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग करके मानव जाति की भलाई के लिए काम करना है

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Comment

Leave a Comment