बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ अमेरिका के 25 शहरों में प्रदर्शन

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वाशिंगटन: बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हो रही हिंसा के विरोध में अमेरिका के विभिन्न हिस्सों में लगातार प्रदर्शन देखने को मिल रहे हैं। बीते कुछ दिनों में अमेरिका के 25 शहरों में शांतिपूर्ण जागरूकता रैलियों का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।

कड़ाके की ठंड, बर्फबारी और जमी हुई सड़कों के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने सिटी हॉल और सिविक सेंटर्स के बाहर एकत्र होकर बांग्लादेश में धार्मिक रूप से लक्षित हिंसा के पीड़ितों के प्रति एकजुटता दिखाई। प्रदर्शनकारियों ने इन रैलियों को गैर-राजनीतिक और पूरी तरह मानवीय बताया।

रैलियों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने मौन रखा, प्रार्थनाएं कीं और कमजोर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए शांतिपूर्ण अपील जारी की। एक मीडिया विज्ञप्ति के अनुसार, मिडवेस्ट से लेकर अमेरिका के पूर्वी और पश्चिमी तट तक आयोजित इन प्रदर्शनों में लिंचिंग, आगजनी, यौन हिंसा और लक्षित हत्याओं की रिपोर्ट की गई घटनाओं के खिलाफ लोगों को जागरूक किया गया।

इस राष्ट्रव्यापी अभियान का समन्वय दैपायन देब, दीप्ति महाजन, गीता सिकंद और दिव्या जैन ने किया। दैपायन देब ने कहा कि ये रैलियां शांतिपूर्ण, गरिमापूर्ण और मानवीय उद्देश्य से प्रेरित थीं। वहीं दीप्ति महाजन ने कहा कि यह पहल राजनीति नहीं, बल्कि करुणा से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि जब निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जाता है, तो मानवीय संवेदना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

गीता सिकंद ने बताया कि रैलियों में विभिन्न समुदायों और धर्मों के लोगों ने भाग लेकर एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी हिंदू अमेरिकी भी बड़ी संख्या में शामिल हुए और बांग्लादेश में हिंदुओं के अस्तित्व को लेकर गहरी चिंता जताई। साथ ही उन्होंने बांग्लादेश सरकार द्वारा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम न उठाए जाने को चिंताजनक बताया।

दिव्या जैन ने इन प्रदर्शनों को शांत लेकिन प्रभावशाली संकल्प का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह दिखाता है कि जागरूकता की शुरुआत सामने आने और आवाज उठाने से होती है। आयोजकों के अनुसार, कई शहरों में स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों और नागरिक नेताओं की भागीदारी ने शांतिपूर्ण नागरिक अभिव्यक्ति और समुदाय-नेतृत्व वाले प्रयासों की अहमियत को रेखांकित किया है।

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Author: Deepak Mittal

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