
शैलेश शर्मा : घरघोड़ा: जनपद पंचायत क्षेत्र में वर्षों पहले जो दुर्गति संपूर्ण साक्षरता अभियान की हुई थी, डर है कि कहीं वैसी ही दुर्गति संपूर्ण स्वच्छता अभियान की न हो जाये ।
जनपद के ग्रामीण इलाकों में चलाये जा रहे संपूर्ण जीसीस्वच्छता अभियान की मॉनिटरिंग को लेकर जिस तरह की लापरवाही दिखाई दे रही है वह कई प्रकार के शंकाओ और कुशंकाओं को जन्म दे रही है ।
ग्रामीण इलाकों में घर-घर शौचालय बनाने के अलावा संपूर्ण स्वच्छता की अलख जगाने वाले इस अति महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत प्रचार-प्रसार के लिये सामाजिक संगठनों को कार्य सौंपा गया था लेकिन उनके द्वारा अपेक्षित प्रचार प्रसार नहीं किया गया इससे इस अभियान की मूल भावना पर विपरीत असर पड़ा है.
परिणाम स्वरूप क्षेत्र के गांव-गांव में इस अभियान की तथाकथित सफलता के बावजूद आम तौर पर साफ-सफाई के मामले में हालात जस के तस बने हुए हैं । बताया जाता है कि इस स्थिति के कारण ही इसे जिस तरह हल्के ढ़ंग से लिया जा रहा है वह आश्चर्यजनक है ।
कायदे से प्रशासन को अलग से एक एजेंसी बनाकर इलाके के उन नगर व सभी गांव में इस कार्यक्रम के असर की जांच करानी चाहिए जहां संपूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत काम-काज किया गया है । इस अभियान के तहत जुटे लोगों की कारगुजारियों के बारे जिलास्तर और राज्य स्तर पर की गई शिकायतों में से कुछ की नमूना बतौर ही सही सूक्ष्म जांच करानी चाहिए ।
संभव है कि इससे संपूर्ण स्वच्छ अभियान के नाम पर हुए गोरखधंधे की परतें उजागर हो सकती है । संपूर्ण स्वच्छता के लिये जन-जागरण का जो विचार था उस पर बहुत अधिक गौर नहीं किया गया । बात बस घर-घर और उससे जुड़े मुद्दों तक ही सिमित रह गई है ।
इसका ही परिणाम है कि आज भी गांव-गांव में और घर-घर में शौचालय निर्माण करवाने के बावजूद इसका उपयोग नहीं के बराबर किया जा रहा है और अभी भी शौचालय का उपयोग करने की बजाय खेत, मैदान, जंगलों को तवज्जों देते नजर आ रहे हैं ।
दरअसल इस अभियान को लेकर जिस तरह की जागरूकता किया जाना था वैसा नहीं हुआ । इस कारण ही इस क्षेत्र में इस कार्यक्रम का वैसा लाभ नहीं मिल रहा है जिसकी उम्मीद की जा रही थी ।
Author: Deepak Mittal










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