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छत्तीसगढ़ की पहली सौर ऊर्जा से संचालित खदान बनी पीईकेबी, पर्यावरण संरक्षण में रचा इतिहास

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Deepak Mittal

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की परसा ईस्ट कांता बासेन (पीईकेबी) कोल खदान ने पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह खदान अब राज्य की पहली ऐसी खदान बन गई है, जो पूरी तरह सौर ऊर्जा पर संचालित होती है। शुक्रवार को यहां 9 मेगावाट क्षमता वाले सौर ऊर्जा संयंत्र का उद्घाटन किया गया।

विधायक राजेश अग्रवाल ने सोलर पैनल बोर्ड का स्विच ऑन कर संयंत्र की शुरुआत की। उन्होंने 30 एकड़ में फैले इस संयंत्र का निरीक्षण भी किया और पर्यावरण-संवेदनशील खनन की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की सराहना की।

कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी

अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड की सहयोगी संस्था मुंद्रा सोलर पीवी लिमिटेड द्वारा लगाए गए इस संयंत्र से हर साल 21.37 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन होगा, जिससे 17,094 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। यह प्रभाव एक लाख पेड़ों के बराबर माना गया है। यह संयंत्र आगामी 25 वर्षों में कुल 4 लाख टन कार्बन उत्सर्जन घटाएगा।

विधायक अग्रवाल ने कहा, “इस तरह की पहलें खनन क्षेत्र की छवि को बदल रही हैं। पीईकेबी खदान पर्यावरणीय संतुलन और समुदाय के उत्थान के बीच सामंजस्य बिठाकर एक उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।”

सामाजिक और पारिस्थितिक योगदान

  • अब तक 15.68 लाख से अधिक पौधे लगाए गए हैं।

  • 1000 से अधिक बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में मुफ्त शिक्षा दी जा रही है।

  • खनन की गई भूमि पर वृक्षारोपण कर उसे फिर से हरा-भरा बनाया जा रहा है।

राज्य में इस प्रकार की पर्यावरणीय और सामाजिक पहलों के माध्यम से पीईकेबी खदान सतत विकास के मॉडल के रूप में उभर रही है। कार्यक्रम में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम, अदाणी एंटरप्राइजेज व खदान प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

हाइड्रोजन ट्रक भी लॉन्च

इसके साथ ही, अदाणी नेचुरल रिसोर्सेज द्वारा हाल ही में रायगढ़ के गारे पेलमा-3 खदान में देश का पहला हाइड्रोजन ट्रक भी लॉन्च किया गया है, जो पर्यावरणीय दृष्टिकोण से एक और बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

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Author: Deepak Mittal

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