Chandra Grahan 2026: 3 मार्च को दिखेगा ‘ब्लड मून’, जानें कितने प्रकार के होते हैं चंद्र ग्रहण

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Deepak Mittal

नई दिल्ली: साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को दिखाई देगा। यह पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसे आमतौर पर ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। वहीं वर्ष का दूसरा चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को होगा, जो आंशिक चंद्र ग्रहण रहेगा।

चंद्र ग्रहण एक आकर्षक खगोलीय घटना है, जो तब घटित होती है जब पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य एक सीधी रेखा में आ जाते हैं। यह घटना पूर्णिमा के दिन होती है। इस दौरान पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा धुंधला या लाल रंग का दिखाई देता है। साफ आसमान में इसे बिना किसी विशेष उपकरण के देखा जा सकता है और यह पृथ्वी के लगभग आधे हिस्से से दिखाई देता है।

चंद्र ग्रहण के प्रकार

चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:

1. पूर्ण चंद्र ग्रहण (ब्लड मून)

जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की गहरी छाया (उम्ब्रा) में प्रवेश कर जाता है, तब पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है। इस दौरान पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरकर आने वाली सूर्य की रोशनी में नीली और बैंगनी किरणें बिखर जाती हैं, जबकि लाल और नारंगी किरणें चंद्रमा तक पहुंचती हैं। इसी कारण चंद्रमा लाल या नारंगी रंग का दिखता है, जिसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। वायुमंडल में धूल या बादलों की मात्रा के अनुसार इसका रंग गहरा या हल्का हो सकता है। यह ग्रहण कई घंटों तक रह सकता है।

2. आंशिक चंद्र ग्रहण

जब चंद्रमा का केवल एक हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया में प्रवेश करता है और बाकी हिस्सा बाहर रहता है, तब आंशिक चंद्र ग्रहण होता है। इस दौरान चंद्रमा का एक भाग अंधकारमय दिखता है, जबकि शेष भाग सामान्य रूप से चमकता रहता है।

3. पेनम्ब्रल चंद्र ग्रहण

जब चंद्रमा पृथ्वी की बाहरी हल्की छाया (पेनम्ब्रा) से होकर गुजरता है, तब पेनम्ब्रल चंद्र ग्रहण होता है। इस स्थिति में चंद्रमा हल्का धुंधला दिखाई देता है और कई बार यह परिवर्तन सामान्य आंखों से स्पष्ट नहीं होता।

क्यों दिखता है लाल चंद्रमा?

सूर्य की रोशनी भले ही सफेद दिखाई देती है, लेकिन उसमें कई रंग शामिल होते हैं। सूर्यास्त या सूर्योदय के समय लाल रंग की रोशनी अधिक दिखाई देती है क्योंकि नीली रोशनी वातावरण में बिखर जाती है। चंद्र ग्रहण के दौरान भी पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की रोशनी को इसी तरह प्रभावित करता है। परिणामस्वरूप, लाल रोशनी चंद्रमा तक पहुंचती है और वह लालिमा लिए नजर आता है — मानो पृथ्वी के सभी सूर्योदय और सूर्यास्त एक साथ चंद्रमा पर प्रतिबिंबित हो रहे हों।

खगोल विज्ञान के अनुसार, चंद्र ग्रहण प्रकृति की एक अद्भुत और सुरक्षित रूप से देखी जा सकने वाली खगोलीय घटना है, जो लोगों में वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ाती है।

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Author: Deepak Mittal

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