नई दिल्ली: Supreme Court of India सोमवार को Meta Platforms और WhatsApp की उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिनमें Competition Commission of India (CCI) द्वारा प्राइवेसी पॉलिसी मामले में लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये के जुर्माने को चुनौती दी गई है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली शामिल हैं, इस मामले पर विचार कर सकती है। इससे पहले 3 फरवरी को कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि कंपनियां “डेटा शेयरिंग के नाम पर नागरिकों की प्राइवेसी के अधिकार के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकतीं।”
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
बेंच ने कहा था कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म मोनोपॉली की स्थिति बना रहे हैं और यूजर्स की निजी जानकारी का दुरुपयोग कर रहे हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने “साइलेंट कस्टमर्स” का जिक्र किया, जो डिजिटल रूप से निर्भर और असंगठित उपभोक्ता हैं तथा डेटा-शेयरिंग नियमों के प्रभाव से अक्सर अनजान रहते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह नागरिकों के मौलिक अधिकारों को प्रभावित नहीं होने देगी।
NCLAT का फैसला
यह विवाद CCI के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें व्हाट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी को प्रतिस्पर्धा कानून का उल्लंघन मानते हुए 213.14 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
4 नवंबर 2025 को National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) ने CCI के आदेश के उस हिस्से को रद्द कर दिया था, जिसमें व्हाट्सऐप को पांच साल तक विज्ञापन के उद्देश्य से मेटा के साथ यूजर डेटा साझा करने से रोका गया था। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने आर्थिक जुर्माने को बरकरार रखा।
बाद में NCLAT ने स्पष्ट किया कि प्राइवेसी और सहमति से जुड़े सुरक्षा उपायों पर उसका निर्णय व्हाट्सऐप से इतर उद्देश्यों के लिए यूजर डेटा के संग्रह और साझाकरण पर भी लागू होगा, जिसमें विज्ञापन और गैर-विज्ञापन गतिविधियां दोनों शामिल हैं।
केंद्र सरकार को पक्षकार बनाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने पहले संकेत दिया था कि वह 9 फरवरी को अंतरिम आदेश पारित करेगा। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि कंपनियों की अपील में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी पक्षकार बनाया जाए।
कोर्ट CCI द्वारा दायर क्रॉस-अपील पर भी सुनवाई कर रहा है, जिसमें NCLAT के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसके तहत व्हाट्सऐप और मेटा को विज्ञापन उद्देश्यों के लिए यूजर डेटा साझा करने की अनुमति दी गई थी।
मामले की सुनवाई डिजिटल प्राइवेसी, डेटा संरक्षण और प्रतिस्पर्धा कानून के व्यापक प्रभावों को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
Author: Deepak Mittal










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