रिहायशी इलाकों में स्थित कोयले के कारोबार से कारोबारी हो रहे मालामाल, काले राखड़ से लोग हो रहे बीमार

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चाम्पा। नगर के आसपास के कोल डिपो में चल रहे काला कारोबार से सफेदपोश बनने के प्रयास में कुछ कारोबारी रिहायशी इलाकों के जनता के स्वास्थ्य से ही खिलवाड़ करने लग गए हैं।


नगर से लगे इलाकों में कोयले के बड़े बड़े ढेर जहाँ एक वर्ग के लोगो के लिए जीविकोपार्जन का साधन बना है, वही दूसरी ओर बहुसंख्याक लोगो को बीमार करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इन – आर्थिक रुप से मजबूत लोगो के सामने प्रशासन भी नतमस्तक है। जबकि गरीबो के लिए हजारों धाराओ सहित बड़े बड़े कानून के नियम बन जाते है। दरअसल, हम बात कर रहे हैं चाम्पा के रिहायशी इलाके की।

जहां बड़ी संख्या में कोल डिपो का संचालन हो रहा है। नगर से – लगे बिर्रा फाटक को पार करते ही कोयला कारोबारियों का – हुजूम लगा हुआ है। शासन प्रशासान इनसे गहरी दोस्ती निभा रही है, क्योकि उनके राजस्व का ये बड़े साधन बने हुए है। आलम यह है कि कोल डिपो के इस संचालन से लोग बीमार हो रहे है। हर दिन बड़ी संख्या में कोयला को लेकर आने जाने वाले भारी वाहनों ने इस पूरे एरिया को प्रदूषित कर दिया है, इससे लोग बीमार हो रहे है। ऐसा नही है कि इसकी जानकारी जिम्मेदारो को न हो पर वहाँ से मिलने वाले लाभ ने उनके आंखों पर पर्दा डाल दिया है।

इस कोयले के कारोबार के लिए रिहायशी इलाके में किए जाने वाले भंडारण ने एक विशेष वर्ग को सम्पूणर्ता प्रदान कर उनके परिवार के जीविकोपार्जन के लिए जहाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, वही दूसारी ओर गरीब लोगों के लिए यह जी का जंजाल बन गया है।

ऐसा होना लाजिमी भी है जो शासन के लोग चुनाव के समय सबके दरबार में मत्था टेकते है बड़े बड़े वादा करते हैं, वो जितने के बाद गरीबो की चिंता करना छोड़ के इनके दर पे नजर आते हैं। तभी तो कोयले के इस कारोबार ने यहाँ से गुजरने वाले लोगो साहित रहवासियों को बीमार होने में कोई कसर नही छोड़ रहे है, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी इनके ऊपर मेहरबान बने हुए है।

हर रोज गुजर रहे सैकड़ो कोयले के वाहन

यहाँ से हर रोज सैकड़ो कोयले के भारी वाहन गुजर रहे हैं। जिनके आने जाने से प्रदूषण होना सामान्य है। राष्ट्रीय राजमार्ग में निजी कारोबार करने वालों के वाहन ही अधिक आना जाना कर रहे है। इससे लोगों के लिए जान की हानि का भय तो बना ही हुआ है, लेकिन इनके प्रदूषण ने हल्की जहर का काम किया है। यहाँ इन निजी कारोबारियों के वाहन ने बीमारियों को आमंत्रित किया है। वाहनों के आने जाने व उनसे निकलने वाले धूल कण लोगो को बीमार कर रहा है।

नेता एवं अधिकारी बने मूकदर्शक

स्थानीय नेता सहित राजनेता एवं अधिकारी सिर्फ मूकदर्शक बने बैठे हुए है। ये इन कारोबारियों के चलते आम लोगों को होने वाले सभी हानियों को भलीभांति जानते है, पर ये अमीर है, इनके सामने बड़े बड़े लोग मौन है। जो सभी जनता के लिए निःस्वार्थ भाव से काम करने का वादा करते हैं वही लोग रहिसो के सामने बौने बन जाते है। अधिकारियों को आम जनता की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं है, उन्हें तो बस कमीशन मिलता रहे। पैसो के सामने आम जनता कोई महत्व नही रखता।

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Author: Deepak Mittal

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