जे के मिश्र / बिलासपुर – अवैध रूप से नक्शा जोड़कर भूमि कब्जे के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक और एफआईआर दर्ज कर ली है। तहसीलदार नूरुल हिलास द्वारा दर्ज की गई इस एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करके नक्शे में हेराफेरी की है और फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भूमि का पट्टा अपने नाम करवा लिया है।
एफआईआर के अनुसार, जिन व्यक्तियों के नाम पर भूमि का फर्जी पट्टा किया गया है, उन्हें तहसील कार्यालय के आदेशों के तहत पट्टा प्रदान किया गया था। खसरा नंबर 292020 के तहत दर्ज भूमि पर 524 भवनों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है, जिन पर कब्जा करने वाले लोग अभी भी बकाया किस्तों का भुगतान नहीं कर रहे हैं।
प्रशासन ने इस मामले में भूमि अधिकारों के दस्तावेजों की जांच की और पाया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर यह हेराफेरी की गई है। तहसील कार्यालय के अनुसार, भूमि का नक्शा 2.10.2020 को जारी किया गया था, जिसमें फर्जी कागजातों का इस्तेमाल कर खसरा में हेराफेरी की गई है।
तहसीलदार द्वारा दर्ज एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि संपत्ति मालिकों ने धोखाधड़ी करते हुए नक्शा फाइलों में गलत जानकारी दर्ज करवाई। इस पूरे मामले में राजस्व विभाग और प्रशासन की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।
प्रशासन द्वारा इस घोटाले की जांच के बाद नक्शा, संपत्ति और भवनों से जुड़े मामलों में कई अनियमितताएं पाई गईं, जिसके आधार पर प्रशासन ने तहसील थाने में धारा 34, 420 IPC के तहत मामला दर्ज किया है।
प्रशासन ने यह भी कहा कि नक्शा घोटाले के इस मामले में 15 साल से अधिक समय से जमीन कब्जे का मामला चल रहा है, जिसमें अब तक कई संपत्तियों का अवैध हस्तांतरण हो चुका है। तहसील और थाने की संयुक्त जांच के बाद पुलिस ने संबंधित आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, और मामले की आगे की जांच जारी है।
Author: Deepak Mittal










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