कोलकाता: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक बड़े मामले में कार्रवाई करते हुए कोलकाता निवासी प्रत्युष कुमार सुरेका (40) को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी 16 जनवरी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई। मामला एम/एस श्री गणेश ज्वेलरी हाउस (इंडिया) लिमिटेड से जुड़ा हुआ है।
ईडी ने यह जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। आरोप है कि कंपनी और उसके प्रमोटरों ने 25 बैंकों के कंसोर्टियम से लगभग 2,672 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। जांच में सामने आया कि वर्ष 2011-12 के दौरान ज्वेलरी कारोबार के नाम पर लिए गए कर्ज की राशि को सोलर पावर परियोजनाओं में अवैध रूप से डायवर्ट किया गया।
ईडी के अनुसार, यह धन एम/एस एलेक्स एस्ट्रल पावर प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी अन्य इकाइयों के माध्यम से निवेश किया गया। प्रत्युष कुमार सुरेका को 24 अप्रैल 2012 को इस कंपनी का संयुक्त प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया था। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि करीब 400 करोड़ रुपये की सोलर पावर परियोजना—जिसमें 120 करोड़ रुपये इक्विटी और 280 करोड़ रुपये बैंक फाइनेंस शामिल था—को धोखाधड़ी के जरिए 20 करोड़ रुपये से भी कम मूल्य पर ट्रांसफर दिखाया गया। यह लेन-देन सुरेका से जुड़ी कंपनियों के माध्यम से किया गया, जिससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
ईडी का आरोप है कि सुरेका ने फर्जी बोर्ड प्रस्ताव तैयार किए, समझौतों को पिछली तारीख में दिखाया, डिजिटल हस्ताक्षरों का दुरुपयोग किया और डमी निदेशकों की नियुक्ति कर वास्तविक नियंत्रण को छिपाने की कोशिश की। इसके अलावा, कंपनी के फंड को फर्जी लोन, झूठे खर्च और घुमावदार लेन-देन के जरिए अपने और परिवार के नियंत्रण वाली कंपनियों में ट्रांसफर किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि कागजों में बिक्री दिखाने के बावजूद श्री गणेश ज्वेलरी हाउस के प्रमोटर निलेश पारेख को उसी सोलर प्रोजेक्ट से उत्पन्न नकद राशि मिलती रही, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग की पुष्टि होती है।
ईडी के मुताबिक, कई अवसर दिए जाने के बावजूद सुरेका ने जांच में सहयोग नहीं किया और विदेश भागने की कोशिश की। 5 जनवरी को उसे कोलकाता एयरपोर्ट पर थाईलैंड जाने का प्रयास करते हुए लुकआउट सर्कुलर के आधार पर रोका गया था। इसके बाद ईडी ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अदालत ने प्रत्युष सुरेका को चार दिन की रिमांड पर भेज दिया है। मामले की आगे जांच जारी है।
Author: Deepak Mittal










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