रश्मि शुक्ला, आस्था योग पीठ, मीनाक्षी नगर, दुर्ग
दुर्ग : आज की तेज़ रफ्तार और तनावपूर्ण जीवनशैली में जहाँ मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक बड़ी चुनौती बन गया है, वहीं भस्त्रिका प्राणायाम जैसे पारंपरिक योग अभ्यास लोगों को राहत और ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। योग विज्ञान में भस्त्रिका प्राणायाम को एक अत्यंत प्रभावशाली और ऊर्जावान श्वसन तकनीक माना जाता है।
भस्त्रिका शब्द का अर्थ है धौंकनी, जो लोहार की भट्ठी में हवा फेंकने का कार्य करती है। इसी सिद्धांत पर यह प्राणायाम कार्य करता है — तेज़ गति से श्वास लेना और छोड़ना, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है और विषैले तत्व बाहर निकलते हैं।
योग विशेषज्ञ के अनुसार, भस्त्रिका प्राणायाम को करने के लिए व्यक्ति को पद्मासन, सुखासन या वज्रासन में बैठना चाहिए।
रीढ़, गर्दन और पीठ को सीधा रखकर आंखें बंद करें और मन को शांत करें।
इसके बाद नासिका द्वारा तेज़ गति से गहरी सांस लें और छोड़ें।
श्वास भरते समय पेट को बाहर और छोड़ते समय अंदर की ओर खींचें।
प्रारंभ में इसे धीमी गति से करें और अभ्यास के साथ धीरे-धीरे तीव्रता बढ़ाएं।
प्रमुख लाभ:
यह प्राणायाम फेफड़ों को मज़बूत करता है और उनकी कार्यक्षमता में सुधार लाता है।
शरीर में जमे विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है और डिटॉक्सिफिकेशन में मदद करता है।
तनाव, चिंता और क्रोध को कम कर मन को शांत करता है।
पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और चयापचय (मेटाबॉलिज़्म) को तेज करता है।
रक्तचाप को संतुलित कर हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
नियमित अभ्यास से वजन कम करने में भी सहायता मिलती है।
विशेष रूप से यह प्राणायाम नेत्र ज्योति को भी सुधारने में सहायक माना गया है।
योगाचार्य रश्मि शुक्ला का मानना है कि यदि भस्त्रिका प्राणायाम को नियमित दिनचर्या का हिस्सा बना लिया जाए, तो व्यक्ति न केवल बीमारियों से बच सकता है, बल्कि मानसिक रूप से भी सशक्त हो सकता है।
आस्था योग पीठ, मीनाक्षी नगर, दुर्ग में प्रतिदिन सैकड़ों लोग इसका अभ्यास कर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
Author: Deepak Mittal










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