भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र से ठीक पहले राज्य सरकार ने बाजार से 5 हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया है। यह पिछले एक सप्ताह में लिया गया दूसरा बड़ा कर्ज है। इससे पहले 4 फरवरी को सरकार 5,300 करोड़ रुपये की उधारी ले चुकी है। लगातार बढ़ती उधारी को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर भाजपा सरकार पर प्रदेश को कर्ज के बोझ में डुबोने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश पर 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका है, जो देश के कुल कर्ज का लगभग 5 प्रतिशत है।
कमलनाथ ने दावा किया कि वर्ष 2007 में प्रदेश पर 52 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। उन्होंने सरकार पर फिजूलखर्ची और इवेंट आधारित राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि राजकोषीय स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सरकार की उधारी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में अब तक 67,300 करोड़ रुपये का कर्ज लिया जा चुका है और 36 बार बाजार से उधारी उठाई गई है, जो राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर गंभीर चिंता का विषय है।
सिंघार ने सरकार से स्पष्ट वित्तीय रोडमैप सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि आगामी बजट सत्र में बढ़ते कर्ज, ब्याज के बोझ और वित्तीय प्रबंधन की पारदर्शिता पर सरकार से विस्तृत जवाब मांगा जाएगा।
बजट सत्र से पहले बढ़ती उधारी को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार आगामी बजट में वित्तीय प्रबंधन और कर्ज नियंत्रण को लेकर क्या रणनीति पेश करती है।
Author: Deepak Mittal










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