वॉशिंगटन: ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को और आक्रामक रूप देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। अमेरिका ने भारत के नेतृत्व वाले इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) समेत 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से खुद को अलग कर लिया है। ट्रंप प्रशासन का साफ कहना है कि अमेरिका अब “बेकार, फिजूलखर्ची और अमेरिका-विरोधी” संगठनों का हिस्सा नहीं रहेगा।
इस फैसले के बाद यह सवाल तेज़ हो गया है—आखिर ट्रंप चाहते क्या हैं? क्या अमेरिका वैश्विक मंचों से खुद को अलग कर रहा है, या दुनिया को अपनी शर्तों पर चलाने की कोशिश में है?
मेमोरेंडम पर साइन, एक झटके में 66 संगठनों से किनारा
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत अमेरिका को उन अंतरराष्ट्रीय संगठनों, समझौतों और संधियों से बाहर निकलने का निर्देश दिया गया है, जो अमेरिकी संप्रभुता और आर्थिक हितों के खिलाफ बताए गए हैं।
व्हाइट हाउस ने इन संस्थाओं को सीधे तौर पर अमेरिका के हितों के विरुद्ध करार दिया है।
विदेश मंत्री का तीखा बयान—‘ग्लोबलिस्ट नौकरशाहों को सब्सिडी नहीं’
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा—
“आज राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐलान किया है कि अमेरिका 66 अमेरिका-विरोधी, बेकार या फिजूलखर्ची वाले अंतरराष्ट्रीय संगठनों को छोड़ रहा है। अन्य संगठनों की समीक्षा अभी जारी है। हम उन ग्लोबलिस्ट नौकरशाहों को सब्सिडी देना बंद करेंगे, जो हमारे हितों के खिलाफ काम करते हैं।”
रूबियो ने इसे ट्रंप द्वारा अमेरिकियों से किए गए एक बड़े वादे को पूरा करने की दिशा में उठाया गया कदम बताया।
35 गैर-UN और 31 UN संगठनों से बाहर
व्हाइट हाउस के मुताबिक, जिन संगठनों से अमेरिका बाहर हुआ है, उनमें
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35 गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठन
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31 संयुक्त राष्ट्र से जुड़े संस्थान
शामिल हैं।
गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठनों में भारत-फ्रांस के नेतृत्व वाला इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), IUCN और IPCC जैसे बड़े पर्यावरण संगठन भी शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र के इन अहम संस्थानों से भी नाता तोड़ा
अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र के जिन प्रमुख संगठनों से दूरी बनाई है, उनमें—
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डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक एंड सोशल अफेयर्स
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इंटरनेशनल लॉ कमीशन
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इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर
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पीसबिल्डिंग कमीशन
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UN एनर्जी
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UN पॉपुलेशन फंड
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UN वाटर
जैसे अहम नाम शामिल हैं।
वैश्विक राजनीति में बढ़ेगा तनाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से जलवायु परिवर्तन, वैश्विक विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर गंभीर असर पड़ सकता है। खासकर भारत की अगुवाई वाले इंटरनेशनल सोलर अलायंस से अमेरिका का बाहर जाना एक राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
Author: Deepak Mittal










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