एकता साहू की संवेदनशील पहल: 10 बच्चों से शुरू हुआ सफर, 100 तक पहुँचाने का संकल्प

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Deepak Mittal

 

गुरूर (बालोद)। बालोद जिले के ब्लॉक मुख्यालय गुरूर में महिला शिक्षिका एकता साहू दिव्यांग (विकलांग) बच्चों के लिए जो कार्य कर रही हैं, वह समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनता जा रहा है। एकता साहू द्वारा संचालित दिव्यांग स्कूल पूरी तरह निःशुल्क है, जहाँ बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ भोजन, आवास, मकान और देखभाल की सभी सुविधाएँ बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई जा रही हैं।

एकता साहू ने इस सेवा कार्य की शुरुआत 10 दिव्यांग बच्चों से की थी, लेकिन उनका सपना बहुत बड़ा है। उनका लक्ष्य है कि भविष्य में इस सेवा को विस्तार देकर 100 से अधिक दिव्यांग बच्चों तक यह सुविधा पहुँचाई जाए, ताकि कोई भी बच्चा केवल अपनी दिव्यांगता के कारण शिक्षा, सम्मान और अवसर से वंचित न रहे।
यह स्कूल केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि संवेदनाओं, करुणा और आत्मसम्मान का घर बन चुका है। यहाँ बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में शिक्षा, संस्कार और सामाजिक व्यवहार का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे वे समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।

एकता साहू ने भावुक शब्दों में कहा—
“दिव्यांग बच्चे बोझ नहीं, बल्कि समाज की शक्ति हैं। अगर उन्हें सही वातावरण, प्रेम और अवसर मिले, तो वे भी हर क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं। मेरी कोशिश है कि कोई भी दिव्यांग बच्चा शिक्षा, भोजन और छत से वंचित न रहे। आज हमने 10 बच्चों से शुरुआत की है, लेकिन आने वाले समय में यह संख्या 100 से भी ज्यादा होगी। यह सिर्फ स्कूल नहीं, इन बच्चों का घर है।”

गुरूर के स्थानीय समाजसेवी उमेश रात्रे ने कहा—
“एकता साहू का यह कार्य केवल शिक्षा नहीं, बल्कि मानवता की सबसे सुंदर मिसाल है। निःशुल्क शिक्षा, भोजन और आवास जैसी सुविधाएँ देना अपने आप में बहुत बड़ा सेवा कार्य है। समाज को ऐसे लोगों से प्रेरणा लेनी चाहिए।”


संवेदनाओं से भरा एक नया भविष्य
एकता साहू का यह प्रयास सिर्फ एक स्कूल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक आंदोलन बनता जा रहा है—जहाँ दिव्यांग बच्चों को दया नहीं, सम्मान मिलता है; सहानुभूति नहीं, अवसर मिलता है; और सहायता नहीं, आत्मनिर्भरता का रास्ता मिलता है।
एकता साहू की यह पहल यह संदेश देती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो एक व्यक्ति भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। दिव्यांग बच्चों के लिए एकता साहू का यह निःशुल्क स्कूल आने वाले समय में बालोद जिले ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक प्रेरणादायी मॉडल बन सकता है।

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Author: Deepak Mittal

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