वॉशिंगटन: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद अमेरिका कुछ उत्पादों पर “राष्ट्रीय सुरक्षा” के आधार पर नए आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की तैयारी में है। प्रस्तावित टैरिफ बड़ी बैटरियां, कास्ट आयरन, प्लास्टिक पाइप, इंडस्ट्रियल केमिकल, पावर ग्रिड और टेलीकॉम उपकरण जैसे क्षेत्रों पर लागू हो सकते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि ये टैरिफ लागू होते हैं तो भारत जैसे देशों पर इसका असर पड़ सकता है, खासकर मेटल, केमिकल और औद्योगिक पुर्जों के निर्यात पर, क्योंकि ये उत्पाद वैश्विक सप्लाई चेन का अहम हिस्सा हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम 1962 के ट्रेड कानून के तहत सेक्शन 232 के प्रावधान के जरिए उठाया जा सकता है। यह प्रावधान राष्ट्रपति को “राष्ट्रीय सुरक्षा” के नाम पर आयात पर शुल्क लगाने का अधिकार देता है। पूर्व में इसी प्रावधान का उपयोग स्टील, एल्युमिनियम, कॉपर, कार और ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ लगाने के लिए किया जा चुका है।
बताया जा रहा है कि प्रस्तावित टैरिफ पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित 15 फीसदी ग्लोबल टैरिफ से अलग हो सकते हैं। हालांकि नई जांच कब शुरू होगी और टैरिफ कब लागू होंगे, इस पर अभी स्पष्टता नहीं है।
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा कि अमेरिका की राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा राष्ट्रपति की सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रशासन अपने सभी कानूनी अधिकारों का उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है।
हाल ही में संयुक्त राज्य अमेरिका का सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए अधिकांश टैरिफ को 6-3 के बहुमत से निरस्त कर दिया था। हालांकि, फैसले में सेक्शन 232 के तहत लगाए जाने वाले संभावित टैरिफ पर कोई टिप्पणी नहीं की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नए टैरिफ लागू होते हैं तो भारत समेत कई व्यापारिक साझेदार देशों के साथ व्यापारिक तनाव बढ़ सकता है, जैसा कि स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए पूर्व टैरिफ के दौरान देखा गया था। फिलहाल वैश्विक बाजार इस संभावित फैसले पर नजर बनाए हुए हैं।
Author: Deepak Mittal










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