नई दिल्ली: देश की राजधानी में सोमवार को दुनिया का सबसे बड़ा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट भव्य शुरुआत के साथ शुरू हुआ। Bharat Mandapam में आयोजित इस वैश्विक सम्मेलन में सुबह 9:30 बजे कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही लंबी कतारें लग गईं। टेक कंपनियों के दिग्गज, उद्योग जगत के नेता, नीति-निर्माता, स्टार्टअप फाउंडर और टेक्नोलॉजिस्ट बड़ी संख्या में पहुंचे।
यह AI इम्पैक्ट समिट 16 से 20 फरवरी तक आयोजित हो रहा है, जिसमें 3,250 से अधिक वक्ता और 500 से ज्यादा सत्र शामिल हैं। एक साथ कई पैरेलल सेशन आयोजित किए जा रहे हैं और अधिकांश हॉल खचाखच भरे हुए हैं। प्रतिभागियों के अनुसार, कई सत्रों में सीटें भर जाने के बाद प्रवेश बंद करना पड़ा।
हालांकि हाई-प्रोफाइल वक्ताओं—Sundar Pichai, Sam Altman और Dario Amodei—के सत्र बुधवार से शुरू होंगे, फिर भी शुरुआती दिनों में उत्साह चरम पर रहा।
समिट के अंतिम दो दिन, 19 और 20 फरवरी को 20 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख शामिल होंगे। इनमें फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron, ब्राजील के राष्ट्रपति Luiz Inacio Lula da Silva और भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi प्रमुख रूप से शामिल रहेंगे।
सम्मेलन में AI के भविष्य, रोजगार पर प्रभाव, स्किलिंग, सुरक्षित और भरोसेमंद AI, गवर्नेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर, जेनरेटिव AI और पब्लिक सेक्टर में इसके उपयोग जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है। एक्सपो क्षेत्र में Google, Nvidia, Amazon, Meta, OpenAI और Microsoft सहित कई वैश्विक और भारतीय कंपनियां अपने AI नवाचार प्रदर्शित कर रही हैं।
आयोजकों के अनुसार, पंजीकरण अपेक्षा से अधिक रहे, जो AI इंफ्रास्ट्रक्चर, एंटरप्राइज अपनाने और सॉवरेन कंप्यूट क्षमताओं में बढ़ती वैश्विक रुचि को दर्शाता है। समिट ‘पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस’ जैसे विषयों पर केंद्रित है और इसमें 300 से अधिक प्रदर्शनी स्टॉल तथा 13 कंट्री पवेलियन शामिल हैं।
इस आयोजन के जरिए भारत खुद को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और AI इनोवेशन के वैश्विक केंद्र के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट से पहले दिए एक साक्षात्कार में कहा कि भारत न केवल दुनिया का डेटा होस्ट करने के लिए तैयार है, बल्कि टेक्नोलॉजी क्रांति की अगली लहर का नेतृत्व करने की क्षमता भी रखता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समिट AI तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने और ‘ग्लोबल AI कॉमन्स’ जैसे साझा अंतरराष्ट्रीय ढांचे पर सहमति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
Author: Deepak Mittal










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