हथियार डाल दो, मुख्यधारा में आओ: बस्तर में माओवादियों से अमित शाह की अपील

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रायपुर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को माओवादियों से हथियार डालकर विकास की मुख्यधारा में शामिल होने की अपील दोहराई। उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की लड़ाई किसी व्यक्ति या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि आदिवासी गांवों की सुरक्षा और भविष्य सुनिश्चित करने के लिए है।

छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित बस्तर पंडुम उत्सव 2026 के समापन समारोह के दौरान आदिवासी समाज की विशाल सभा को संबोधित करते हुए गृह मंत्री ने हथियारबंद माओवादियों से सरेंडर करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की आकर्षक पुनर्वास नीति के तहत अब तक 2,500 से अधिक लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं और उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान किया गया है।

हिंसा करने वालों पर सख्ती तय

अमित शाह ने चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग आईईडी लगाते हैं, गांवों पर हमले करते हैं या स्कूलों को निशाना बनाते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दो टूक कहा कि हिंसा का कोई औचित्य नहीं है और माओवाद ने बस्तर को केवल विनाश ही दिया है।

बस्तर में बदलाव, विकास की नई तस्वीर

गृह मंत्री ने बस्तर में आए सकारात्मक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र अब देश के सामने एक चमकते उदाहरण के रूप में उभर रहा है। दशकों से बंद पड़े स्कूल दोबारा खुल गए हैं और उन्होंने भरोसा दिलाया कि पांच वर्षों के भीतर बस्तर छत्तीसगढ़ का सबसे विकसित संभाग बनेगा

उन्होंने कहा कि 27 दिसंबर तक हर गांव में बिजली, मोबाइल कनेक्टिविटी के साथ-साथ अस्पताल, कॉलेज, डाकघर और अन्य जरूरी सुविधाओं की पूरी पहुंच सुनिश्चित की जाएगी।

आदिवासी किसानों और युवाओं के लिए बड़े ऐलान

अमित शाह ने कहा कि सरकार सभी आदिवासी किसानों का धान खरीदेगी तथा उन्हें मुफ्त चावल, गैस सिलेंडर और नल से जल उपलब्ध कराया जाएगा। नक्सलवाद समाप्त होने के बाद बस्तर में एडवेंचर टूरिज्म, होम-स्टे, कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसे नए अवसरों को बढ़ावा दिया जाएगा।

उन्होंने कई बड़ी विकास परियोजनाओं की घोषणा की, जिनमें

  • 118 एकड़ में नया औद्योगिक क्षेत्र,

  • इंद्रावती नदी पर सिंचाई एवं 120 मेगावाट बिजली परियोजना,

  • 3,500 करोड़ रुपए की रावघाट–जगदलपुर रेल लाइन,

  • नदी जोड़ो परियोजना,

  • 90 हजार युवाओं के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण
    शामिल हैं।

कर्फ्यू से संस्कृति की रौनक तक का सफर

गृह मंत्री ने कहा कि कभी कर्फ्यू जैसे हालात झेलने वाला बस्तर आज मुस्कुराते चेहरों, सांस्कृतिक नृत्यों और सामाजिक उत्साह से भरा नजर आता है, जो इस क्षेत्र में आए गहरे बदलाव को दर्शाता है।

बस्तर की आदिवासी विरासत को राष्ट्रीय मंच

अमित शाह ने बस्तर की समृद्ध जनजातीय विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र अबूझ माड़िया, दंडामी माड़िया, मुरिया, गोंड, हल्बा, भतरा, डोरला, धुरवा, परजा और गडबा जैसे अनेक समुदायों का घर है, जिनकी अपनी विशिष्ट भाषाएं, नृत्य और परंपराएं हैं।

उन्होंने बस्तर पंडुम उत्सव की सराहना करते हुए घोषणा की कि 12ों श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों को राष्ट्रपति भवन आमंत्रित किया जाएगा, जहां वे अपनी कला का प्रदर्शन करेंगी और राष्ट्रपति के साथ भोजन करेंगी।

शहीद जवानों को श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में शहीद एवं घायल सुरक्षा बलों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके साहस और बलिदान को राष्ट्र के लिए अमूल्य बताया।

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Author: Deepak Mittal

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