देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जांच को सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में सीबीआई से कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में राष्ट्रपति से भी अनुरोध किया गया है। देहरादून में आईएएनएस से बातचीत में हरीश रावत ने कहा कि मामले में शामिल वीआईपी के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और नष्ट किए गए सबूतों की भी गहन जांच आवश्यक है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि वे ‘अंकिता भंडारी को न्याय दो’ की मांग को लेकर आयोजित महापंचायत में पहुंचे और वहां अंकिता के माता-पिता से मुलाकात कर एकजुटता जताई। उन्होंने कहा कि बेटी को खोने के अपार दुःख के बावजूद माता-पिता का संयम और साहस प्रेरणादायी है। न्याय की उनकी दृढ़ मांग ने पूरे उत्तराखंड को एकजुट किया है।
हरीश रावत ने कहा कि अंकिता के माता-पिता की पीड़ा हर उत्तराखंडी की साझा पीड़ा है और इस न्याय की लड़ाई में पूरा उत्तराखंड उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष बद्रीनाथ, केदारनाथ, हेमकुंड साहिब और कलियर जैसे पवित्र स्थलों की पुकार का परिणाम है, जिससे मामला एक बार फिर प्रासंगिक हुआ है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह लड़ाई निर्णायक मोड़ तक ले जानी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले में शामिल वीआईपी, साक्ष्य नष्ट करने वाले और वे पुलिस अधिकारी जिन्होंने जांच में टाल-मटोल की, कानून के शिकंजे में नहीं आते, तब तक यह संघर्ष थमना नहीं चाहिए।
इसी दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को ‘गद्दार दोस्त’ कहे जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए हरीश रावत ने कहा कि जिस व्यक्ति को पार्टी ने कई बार सांसद बनाया और अहम जिम्मेदारियां दीं, यदि वही व्यक्ति पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो जाता है, तो उसी संदर्भ में यह टिप्पणी की गई है।
Author: Deepak Mittal










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