मणिपुर/नई दिल्ली: कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (KSO), दिल्ली और एनसीआर ने मणिपुर में हाल ही में गठित ‘लोकप्रिय सरकार’ को औपचारिक रूप से खारिज करते हुए उसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। शनिवार को जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान संगठन ने कहा कि कुकी-ज़ो समुदाय की नजर में मौजूदा सरकार के पास कोई नैतिक और राजनीतिक वैधता नहीं है, क्योंकि समुदाय के लोग अब भी विस्थापन, भय और गहरे सदमे की स्थिति में जी रहे हैं।
KSO ने आरोप लगाया कि न्याय, जवाबदेही और प्रभावित समुदाय की सहमति के बिना मणिपुर में प्रशासनिक सामान्य स्थिति दिखाने की कोशिश पूरी तरह अस्वीकार्य है। संगठन ने स्पष्ट किया कि कुकी-ज़ो लोग अब खुद को मणिपुर के मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा नहीं मानते। इसके लिए उन्होंने 3 मई 2023 से जारी हिंसा के चलते हुए “अपरिवर्तनीय राजनीतिक अलगाव” का हवाला दिया।
संगठन का कहना है कि यह संकट केवल राजनीतिक तालमेल का मुद्दा नहीं है, बल्कि भरोसे के पूरी तरह टूटने का प्रतीक है, जिसने एक ही राज्य ढांचे के तहत साथ रहना असंभव बना दिया है। मानवीय नुकसान का जिक्र करते हुए KSO ने दावा किया कि हिंसा शुरू होने के बाद से 226 कुकी-ज़ो लोगों की जान जा चुकी है, 200 से अधिक गांव जला दिए गए हैं, 7,000 से ज्यादा घर नष्ट हुए हैं, 360 से अधिक चर्च और यहूदी प्रार्थना स्थल क्षतिग्रस्त किए गए हैं तथा 41,425 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं।
KSO ने कहा कि शांति केवल राजनीतिक बयानों से हासिल नहीं की जा सकती और न ही प्रतीकात्मक कदम सामूहिक सदमे को दूर कर सकते हैं या संरचनात्मक समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। संगठन ने केंद्र शासित प्रदेश के तहत अलग प्रशासन (अनुच्छेद 239A, पुडुचेरी मॉडल) की अपनी मांग दोहराते हुए इसे कुकी-ज़ो लोगों की सुरक्षा और न्याय के लिए “एकमात्र व्यवहार्य और स्थायी समाधान” बताया।
इसके साथ ही KSO ने भारत सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की। इसमें हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी, पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह से जुड़े कथित लीक ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच, कुकी-ज़ो समुदाय के खिलाफ अपराधों में शामिल लोगों पर मुकदमा, कुकी-ज़ो क्षेत्रों में एक हवाई अड्डे को मंजूरी देना और अलग प्रशासन को लेकर राजनीतिक बातचीत तेज करने की मांग शामिल है।
Author: Deepak Mittal










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