भुवनेश्वर: ओडिशा में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान को बड़ी सफलता मिली है। शुक्रवार को 19 माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इसे नक्सल-मुक्त भारत के राष्ट्रीय मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार का मुख्य लक्ष्य राज्य का विकास करते हुए प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री माझी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि वामपंथी उग्रवाद के खात्मे के लिए चलाए जा रहे अभियान में यह एक निर्णायक सफलता है। उन्होंने बताया कि लगातार खुफिया सूचनाओं पर आधारित अभियानों और सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयासों के चलते रायगढ़ जिले के बांसधारा-घुमसर-नागबली डिवीजन तथा कंधमाल जिले के कलाहांडी-कंधमाल-बौध-नयागढ़ डिवीजन के 19 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया है।
इन आत्मसमर्पण करने वालों में दो राज्य समिति सदस्य भी शामिल हैं—निखिल उर्फ निरंजन राउत और अंकिता उर्फ रास्मिता लेन्का—जिन पर कुल 55 लाख रुपये का इनाम घोषित था। सुरक्षा बलों ने इस ऑपरेशन के दौरान एके-47 राइफल और एसएलआर समेत 14 अत्याधुनिक और घातक हथियार भी बरामद किए हैं।
सीएम माझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्णायक नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति तथा राज्यों को मिल रहे मजबूत समर्थन के कारण यह अभियान निर्णायक चरण तक पहुंच सका है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार 31 मार्च तक ओडिशा को पूरी तरह माओवादी-मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जो लोग हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उन्हें पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति के तहत संस्थागत सहायता, कानूनी सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का अवसर दिया जाएगा।
उन्होंने शेष माओवादी कैडरों से अपील करते हुए कहा कि हिंसा का कोई भविष्य नहीं है और केवल शांति, विकास तथा कानून का शासन ही ओडिशा की दिशा और दशा तय करेगा।
Author: Deepak Mittal










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