कर्नाटक विधानसभा में ‘विकसित भारत–जी राम जी’ योजना के खिलाफ प्रस्ताव पारित, भाजपा ने बताया अवैध

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

बेंगलुरु: कर्नाटक विधानसभा के दोनों सदनों—विधानसभा और विधान परिषद—ने बुधवार को केंद्र सरकार की प्रस्तावित “विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम” के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की मांग की गई। यह प्रस्ताव भाजपा और जनता दल (सेकुलर) के कड़े विरोध के बीच पारित हुआ।

प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने तीखी आपत्ति जताई और वॉकआउट कर दिया। विधानसभा में स्पीकर यू.टी. खादर और विधान परिषद में अध्यक्ष बसवराज होरटी ने मतदान कराया। मतदान में कांग्रेस सरकार के पक्ष में बहुमत मिलने के बाद दोनों सदनों में प्रस्ताव को पारित घोषित किया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री प्रियांक खारगे ने सदन में कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता एल.के. आडवाणी स्वयं नरेगा योजना की प्रशंसा कर चुके हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि नए ‘वीबी जी राम जी’ अधिनियम में आखिर ऐसा क्या है, जिसकी जानकारी भाजपा नेताओं को भी स्पष्ट रूप से नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने मनरेगा अधिनियम को बदलने की कोशिश की है।

भाजपा सांसद वरुण गांधी द्वारा पहले लोकसभा में मजदूरों की स्थिति को लेकर उठाए गए सवालों का उल्लेख करते हुए मंत्री खारगे ने कहा कि केंद्र सरकार ने तब पारदर्शिता की बात कही थी, लेकिन अब उसी योजना के स्वरूप में बदलाव किया जा रहा है।

वहीं, विपक्ष के नेता आर. अशोक ने प्रस्ताव को अवैध बताते हुए कहा कि विधानसभा में किसी केंद्रीय अधिनियम के खिलाफ प्रस्ताव पारित करना नियमों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना सात दिन का नोटिस और समुचित चर्चा के अचानक यह प्रस्ताव लाया गया, जो केवल केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक प्रचार है।

आर. अशोक ने दावा किया कि ग्रामीण विकास विभाग के सर्वे के अनुसार रोजगार गारंटी योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023–24 में 31,624 मामलों में 16.19 करोड़ रुपये, 2024–25 में 20,742 मामलों में 50.23 करोड़ रुपये और 2025–26 में 18.13 करोड़ रुपये के दुरुपयोग के मामले सामने आए हैं। यह धन फर्जी बिल, पक्षपात और कथित कांग्रेस एजेंटों को काम देने के जरिए लूटा गया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार अपनी 40 प्रतिशत हिस्सेदारी देने में हिचकिचा रही है, जबकि योजना पूरी तरह पारदर्शी है और ग्रामीणों के हित में है। भाजपा नेताओं ने कहा कि नरेगा योजना 20 वर्ष पुरानी है और अब इसके तहत काम के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 कर दिया गया है, जिससे मजदूरों को 25 अतिरिक्त दिनों का रोजगार मिलेगा।

मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने कहा कि नए अधिनियम को लागू करने से पहले राज्यों से पर्याप्त चर्चा नहीं की गई। उन्होंने 60:40 के वित्तीय अनुपात पर भी आपत्ति जताई और कहा कि महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना स्वीकार्य नहीं है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में केंद्र सरकार और राष्ट्रपति को औपचारिक अपील भेजी जाएगी।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Comment

Leave a Comment