71% भारतीय रिक्रूटर टैलेंट खोजने में AI पर कर रहे भरोसा: लिंक्डइन रिपोर्ट

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

नई दिल्ली: देश में सही टैलेंट की तलाश लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस समस्या को काफी हद तक आसान बना रहा है। मंगलवार को जारी लिंक्डइन की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 71 प्रतिशत रिक्रूटर ने माना है कि AI की मदद से वे ऐसे कैंडिडेट्स को खोज पाए हैं, जिन्हें वे पहले नजरअंदाज कर देते थे।

यह रिपोर्ट प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म लिंक्डइन द्वारा 6,554 ग्लोबल HR प्रोफेशनल्स के सर्वे पर आधारित है। रिपोर्ट में बताया गया है कि रिक्रूटर तेजी से सही स्किल्स पहचानने और हायरिंग प्रक्रिया को तेज करने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। करीब 80 प्रतिशत रिक्रूटर का कहना है कि AI कैंडिडेट की स्किल्स को समझना और आंकना आसान बनाता है, जबकि 76 प्रतिशत का मानना है कि AI पहले से ही हायरिंग स्पीड बढ़ा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 10 में से 8 भारतीय रिक्रूटर हायरिंग टारगेट्स को पूरा करने, आवेदकों के मूल्यांकन और टॉप टैलेंट की पहचान के लिए आने वाले समय में AI के इस्तेमाल को और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। इसके साथ ही, 2026 तक प्री-स्क्रीनिंग इंटरव्यू में AI के उपयोग को बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। रिक्रूटरों का मानना है कि इससे रिक्रूटर और कैंडिडेट के बीच अधिक सार्थक बातचीत (83 प्रतिशत), तेज हायरिंग अनुभव (83 प्रतिशत) और बेहतर कैंडिडेट इनसाइट्स (82 प्रतिशत) मिलेंगी।

लिंक्डइन टैलेंट सॉल्यूशंस की APAC वाइस प्रेसिडेंट रुचि आनंद ने कहा कि हायरिंग में एक संरचनात्मक बदलाव देखा जा रहा है, जहां डिग्री और पुराने टाइटल्स से हटकर अब स्किल्स और काबिलियत पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, “AI के बिना इस बदलाव को बड़े पैमाने पर लागू करना मुश्किल है। जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने पर AI रिक्रूटर को सही स्किल्स जल्दी पहचानने, स्क्रीनिंग की जटिलताओं को कम करने और अधिक निष्पक्ष व सुसंगत मूल्यांकन प्रक्रिया बनाने में मदद करता है।”

रिसर्च में यह भी सामने आया कि 74 प्रतिशत रिक्रूटर को अब क्वालिफाइड कैंडिडेट ढूंढने में दिक्कत हो रही है, जबकि भारत में हायरिंग गतिविधि महामारी से पहले के स्तर की तुलना में 40 प्रतिशत अधिक है। इसका प्रमुख कारण वॉल्यूम और क्वालिटी के बीच बढ़ता अंतर है। जिन रिक्रूटरों को हायरिंग कठिन लग रही है, उनमें से 53 प्रतिशत ने AI-जेनरेटेड एप्लीकेशनों में बढ़ोतरी को कारण बताया, जबकि 47 प्रतिशत ने डिमांड में मौजूद स्किल्स की कमी की ओर इशारा किया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जैसे-जैसे हायरिंग में AI की भूमिका बढ़ रही है, वैसे-वैसे कैंडिडेट्स की पारदर्शिता को लेकर अपेक्षाएं भी बढ़ी हैं। भारत में 50 प्रतिशत रिक्रूटरों का कहना है कि उन पर यह दबाव है कि वे स्पष्ट करें कि उनकी हायरिंग प्रक्रिया और स्क्रीनिंग में AI का इस्तेमाल कैसे किया जा रहा है।

रुचि आनंद ने कहा कि लिंक्डइन का फोकस ऐसे AI टूल्स विकसित करने पर है, जो हायरिंग असिस्टेंट की तरह काम करें और रिक्रूटरों को निर्णय लेने में मदद दें, ताकि वे क्वालिटी और कैंडिडेट एक्सपीरियंस से समझौता किए बिना सही टैलेंट को तेजी और भरोसे के साथ चुन सकें।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

September 2026
S M T W T F S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *