रायपुर: छत्तीसगढ़ में नकली और स्तरहीन दवाओं के कारोबार को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि ड्रग कंट्रोल विभाग के कुछ अधिकारियों और बाहरी दवा कारोबारियों के कथित सिंडिकेट के कारण प्रदेश की ढाई करोड़ जनता की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है।
आरोपों के मुताबिक, बाज़ार में ऐसी दवाइयाँ बेची जा रही हैं, जिनमें निर्धारित मात्रा से काफी कम कैमिकल कंपाउंड पाया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, 600 एमजी लिखी गई टैबलेट में मात्र 150 एमजी तक प्रभावी तत्व होने का दावा किया गया है। इससे मरीजों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही और उन्हें दिन में एक की जगह तीन–चार गोलियां खानी पड़ रही हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों का दावा है कि कम गुणवत्ता वाली दवाओं के सेवन से मरीजों में नई-नई बीमारियां पनप रही हैं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। आरोप यह भी है कि बड़े मेडिकल स्टोर, नर्सिंग होम और नामचीन निजी अस्पतालों तक में मानक से कम गुणवत्ता की दवाइयों की आपूर्ति की जा रही है।
आरोपों में कहा गया है कि ड्रग कंट्रोल विभाग को नियमों के तहत हर दवा की लॉन्चिंग से पहले लैब टेस्ट, गुणवत्ता जांच और प्रमाणन करना होता है, लेकिन कथित तौर पर यह प्रक्रिया दरकिनार कर पैसे लेकर दवाओं को बाजार में बेचने की अनुमति दी जा रही है। यह भी आरोप है कि विभाग यह जांच नहीं करता कि दवाओं में दर्शाई गई मात्रा और गुणवत्ता वास्तव में मौजूद है या नहीं।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकारी अस्पतालों पर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली कुछ दवाएं भी मानक स्तर की नहीं हैं, जिससे मरीजों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पा रहा।
फिलहाल ये सभी गंभीर आरोप हैं। मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग या ड्रग कंट्रोल विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक स्तर पर जांच होती है या नहीं, इस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
Author: Deepak Mittal










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