UGC के इक्विटी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, दिल्ली के कैंपस में पसरा सन्नाटा

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दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में जारी किए गए इक्विटी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद दिल्ली के विश्वविद्यालय परिसरों में शांति का माहौल देखने को मिल रहा है। जहां बीते दिनों तक इन नियमों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे, वहीं अब कैंपस में सामान्य गतिविधियां लौट आई हैं और छात्र आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं।

UGC द्वारा जारी इन नियमों के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में हाशिए पर पड़े समुदायों के छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए इक्विटी कमेटी, हेल्पलाइन और शिकायत निवारण तंत्र बनाने का प्रावधान किया गया था। आयोग ने इसे सुरक्षित और समावेशी कैंपस की दिशा में अहम कदम बताया था। हालांकि, कई छात्रों ने इन नियमों को बिना पर्याप्त स्पष्टता के लागू किए जाने पर आपत्ति जताई थी।

रोक लगने से पहले छात्रों ने शिकायतों की जांच प्रक्रिया, आरोपियों के अधिकारों और सुरक्षा उपायों को लेकर चिंता जताई थी। एक छात्र अखिलेश तिवारी ने कहा, “समस्या इक्विटी के विचार से नहीं है, समस्या अनिश्चितता की है। किसी को नहीं पता था कि प्रक्रिया क्या होगी और फैसले किस आधार पर लिए जाएंगे।”

अब विरोध थमने के बाद कैंपस में चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि यदि ये नियम दोबारा लागू होते हैं, तो उनमें क्या बदलाव किए जाने चाहिए। छात्रों ने विस्तृत लिखित प्रक्रियाएं, जांच के लिए तय समय-सीमा, स्पष्ट अपील तंत्र और इक्विटी कमेटियों में संतुलित प्रतिनिधित्व की मांग की है। छात्रों का कहना है कि प्रक्रिया में भरोसा कायम रखने के लिए चुने हुए छात्र प्रतिनिधियों को भी कमेटी में शामिल किया जाना चाहिए।

रिसर्च स्कॉलर्स ने भी इस मुद्दे पर गंभीर चिंताएं जाहिर की हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के एक पीएचडी स्कॉलर आलोकित त्रिपाठी ने कहा, “फेलोशिप, मूल्यांकन और सिफारिशें हमारे भविष्य को प्रभावित करती हैं। शिकायत निवारण तंत्र बेहद सटीक होना चाहिए, वरना यह छात्रों और फैकल्टी दोनों के लिए दबाव और भय का कारण बन सकता है।”

छात्रों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की रोक को वे मुद्दे के अंत के तौर पर नहीं, बल्कि संवाद के अवसर के रूप में देख रहे हैं। एक छात्र नेता शर्मा ने कहा, “अगर रोक के बाद नियम बिना किसी बदलाव के वापस आते हैं, तो विरोध फिर से होगा। लेकिन अगर हमारी चिंताओं को गंभीरता से सुना गया, तो टकराव से बचा जा सकता है।”

फिलहाल दिल्ली की यूनिवर्सिटियों में कक्षाएं सामान्य रूप से चल रही हैं, विरोध स्थलों पर सन्नाटा है और छात्र इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि आगे कानूनी और नीतिगत स्तर पर क्या फैसला होता है। अब यह देखना अहम होगा कि यह शांति सहमति में बदलती है या फिर एक नए टकराव की भूमिका बनती है।

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Author: Deepak Mittal

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