मिड-डे मील हड़ताल पर सख्त प्रशासनिक आदेश, संचालन बाधित होने पर समूहों पर होगी कार्रवाई

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रायपुर: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में मध्यान्ह भोजन योजना (मिड-डे मील) को लेकर रसोईयों की चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि रसोईयों की अनुपस्थिति के कारण यदि भोजन निर्माण या वितरण बाधित होता है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संचालनकर्ता समूहों की होगी।

जारी आदेश के अनुसार, हड़ताल की स्थिति में यदि मध्यान्ह भोजन योजना का संचालन प्रभावित पाया गया, तो इसके लिए केवल रसोईयों को ही नहीं बल्कि संबंधित संचालनकर्ता समूहों को भी समान रूप से जिम्मेदार माना जाएगा। ऐसे मामलों में समूहों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। आदेश में संचालनकर्ता समूह को हटाने, कुर्की कास्ट (खर्च मद) में कटौती और मानदेय में कटौती जैसे दंडात्मक प्रावधानों का स्पष्ट उल्लेख किया गया है।

स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय ने यह आदेश प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को भेजते हुए जिले स्तर पर सख्त निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि मध्यान्ह भोजन योजना बच्चों के पोषण और स्कूलों में उपस्थिति से सीधे तौर पर जुड़ी है, इसलिए इसके संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

वहीं, इस आदेश को लेकर रसोइया संघ ने तीखी आपत्ति जताई है। संघ ने प्रशासनिक फैसले को तानाशाही करार देते हुए आरोप लगाया है कि यह हड़ताल को दबाव के जरिए खत्म कराने का प्रयास है। संघ पदाधिकारियों का कहना है कि एक ओर शिक्षा मंत्री उनकी मांगों को जायज ठहरा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभागीय अधिकारी कठोर और दमनात्मक आदेश जारी कर रहे हैं, जो विरोधाभासी है।

रसोइया संघ ने बताया कि प्रदेश की रसोईया पहले से ही बेहद कम मानदेय पर कार्य कर रही हैं और वर्षों से वेतन वृद्धि, नियमितीकरण और सामाजिक सुरक्षा जैसी मांगों को लेकर संघर्ष कर रही हैं। उनका आरोप है कि समस्याओं का समाधान करने के बजाय डराने-धमकाने की नीति अपनाई जा रही है।

गौरतलब है कि प्रदेश में पिछले 30 दिनों से अधिक समय से करीब 86 हजार रसोईया अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, जिसका सीधा असर मध्यान्ह भोजन योजना पर पड़ रहा है। कई जिलों में बच्चों को भोजन नहीं मिल पा रहा है, जिससे योजना के ठप होने जैसी स्थिति बनती जा रही है। ऐसे में यह मामला अब प्रशासन और रसोइया संघ के बीच टकराव का रूप लेता जा रहा है। सरकार बच्चों के हित में योजना को सुचारू रखने की बात कर रही है, वहीं रसोईया अपनी मांगों पर अड़ी हुई हैं। आने वाले दिनों में इस विवाद के समाधान को लेकर सरकार क्या कदम उठाती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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Author: Deepak Mittal

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