मुंबई: कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में खुला। शुरुआती कारोबार में निफ्टी के लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स में कमजोरी देखने को मिली, जिससे बाजार पर बिकवाली का दबाव बना रहा।
खबर लिखे जाने तक 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स करीब 498 अंक या 0.60 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83,072 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, एनएसई निफ्टी 134 अंक या 0.52 प्रतिशत टूटकर 25,560 के स्तर पर आ गया।
शुरुआती कारोबार में रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल), आईसीआईसीआई बैंक, विप्रो, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और सिप्ला के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सतर्कता की बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने आठ यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने की बात कही है। इसके साथ ही यूरोपीय देशों द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की योजना का विरोध किए जाने से वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है।
विस्तृत बाजार की बात करें तो निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.40 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.48 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी फार्मा 0.6 प्रतिशत, निफ्टी आईटी 0.5 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो 0.4 प्रतिशत कमजोर रहा। हालांकि निफ्टी मेटल इंडेक्स में 0.24 प्रतिशत की हल्की बढ़त देखने को मिली।
शेयरवार प्रदर्शन की बात करें तो रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर शुरुआती कारोबार में 2 प्रतिशत से अधिक टूट गए, जबकि कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में बेहतर मुनाफा दर्ज किया है। विप्रो के शेयरों में 7 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई। इसके अलावा टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स 2.8 प्रतिशत, मैक्सहेल्थ करीब 2.9 प्रतिशत, इंफोसिस 1 प्रतिशत से अधिक और सिप्ला 0.9 प्रतिशत तक कमजोर रहा।
दूसरी ओर टेक महिंद्रा, इंडिगो, बजाज फाइनेंस, ट्रेंट, एचयूएल, कोटक महिंद्रा बैंक, एक्सिस बैंक, बीईएल और एचडीएफसी लाइफ के शेयर टॉप गेनर्स में शामिल रहे।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले हफ्ते निफ्टी में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था। इस दौरान इंडेक्स ने 25,899 का उच्च और 25,473 का निचला स्तर छुआ था। अंत में निफ्टी मामूली बढ़त के साथ 25,694 पर बंद हुआ, जो बाजार में जारी असमंजस को दर्शाता है। तकनीकी तौर पर निफ्टी अभी 20-दिवसीय और 50-दिवसीय ईएमए से नीचे कारोबार कर रहा है, हालांकि 200-दिवसीय ईएमए से ऊपर बने रहने के कारण मीडियम टर्म ट्रेंड को अब भी सकारात्मक माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऊपर की ओर 25,875 के स्तर पर पहला बड़ा रेजिस्टेंस है, इसके बाद 26,000 और 26,100 अहम स्तर होंगे। वहीं नीचे की ओर 25,600 और 25,450 के स्तर मजबूत सपोर्ट माने जा रहे हैं। लगातार बनी वैश्विक अनिश्चितता को देखते हुए निवेशकों और ट्रेडर्स को चयनित और अनुशासित रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है। गिरावट के दौरान मजबूत बुनियादी स्थिति वाले शेयरों पर ही ध्यान देना बेहतर माना जा रहा है।
Author: Deepak Mittal








