वॉशिंगटन: अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक फेडरल कोर्ट ने इमिग्रेशन अधिकारियों को दो भारतीय नागरिकों को रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि बिना किसी नोटिस और सुनवाई के इन लोगों को हिरासत में रखना संवैधानिक प्रक्रिया का उल्लंघन हो सकता है। यह आदेश ऐसे समय में आया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देशों के बाद अमेरिका में प्रवासी नीतियों को और सख्त किया गया है और आईसीई (इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) द्वारा प्रवासियों की कड़ी जांच की जा रही है।
इससे पहले भी इसी मामले में अमेरिकी कोर्ट तीन भारतीय नागरिकों को रिहा करने का आदेश दे चुका है। ये सभी आदेश इस सप्ताह पूर्वी कैलिफोर्निया के अमेरिकी जिला न्यायालय द्वारा जारी किए गए। कोर्ट ने दोनों मामलों में पाया कि आईसीई ने संबंधित व्यक्तियों को हिरासत में लेने से पहले न तो कोई नोटिस दिया और न ही सुनवाई का अवसर या कानूनी आधार प्रस्तुत किया।
एक मामले में, चीफ यूएस जिला जज ट्रॉय एल ननली ने भारतीय नागरिक किरणदीप को तत्काल रिहा करने का आदेश दिया। किरणदीप दिसंबर 2021 में अमेरिका आई थीं और उन्होंने शरण के लिए आवेदन किया था। कोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार, वह जांच के साथ अमेरिका में दाखिल हुई थीं और अधिकारियों ने पहले यह माना था कि वह न तो समुदाय के लिए खतरा हैं और न ही उनके फरार होने की आशंका है। किरणदीप पिछले चार वर्षों से कैलिफोर्निया में रह रही थीं और इस दौरान उन्होंने आईसीई और अमेरिकी नागरिकता एवं इमिग्रेशन सेवा के सभी तय चेक-इन में समय पर हिस्सा लिया। वह कैलिफोर्निया में अपने साझेदार के साथ रहती थीं।
सितंबर 2025 में एक रूटीन आईसीई चेक-इन के दौरान किरणदीप को हिरासत में लिया गया था। अधिकारियों ने आरोप लगाया था कि वह एक तय समय पर आईसीई के सामने पेश नहीं हुई थीं। हालांकि, उन्होंने अपनी अनुपस्थिति की उचित वजह बताई थी और अगले ही दिन चेक-इन किया था, जिसे उस समय आईसीई ने स्वीकार भी कर लिया था। जज ननली ने अपने आदेश में कहा कि बिना सुनवाई के लगातार हिरासत में रखना उचित प्रक्रिया का उल्लंघन प्रतीत होता है। कोर्ट ने किरणदीप को तुरंत रिहा करने और बिना नोटिस के दोबारा गिरफ्तार न करने का भी निर्देश दिया।
एक अन्य फैसले में, जज ननली ने भारतीय नागरिक रोहित को भी रिहा करने का आदेश दिया। रोहित नवंबर 2021 में बिना निरीक्षण के अमेरिका आए थे और उन्होंने भारत में राजनीतिक उत्पीड़न का डर बताते हुए शरण मांगी थी। उन्हें जून 2025 में हिरासत में लिया गया था और वह बिना बॉन्ड सुनवाई के सात महीने से अधिक समय तक हिरासत में रहे। कोर्ट ने पाया कि रोहित के समुदाय के साथ मजबूत संबंध थे, लेकिन सरकार यह साबित नहीं कर पाई कि उनकी निरंतर हिरासत क्यों जरूरी थी।
जज ननली ने कहा कि बिना किसी प्रक्रिया के किसी व्यक्ति को लंबे समय तक हिरासत में रखना उसकी स्वतंत्रता को गलत तरीके से छीनने का गंभीर खतरा पैदा करता है। कोर्ट ने दोनों मामलों में स्पष्ट किया कि जब इमिग्रेशन अधिकारी किसी व्यक्ति को हिरासत से रिहा करते हैं, तो उसे सुरक्षित और संवैधानिक आजादी का अधिकार प्राप्त हो जाता है।
Author: Deepak Mittal










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