मुंबई : महाराष्ट्र में जहां भाजपा की अगुवाई वाले महायुति गठबंधन ने कई नगर निगमों में जीत दर्ज की है, वहीं मराठवाड़ा क्षेत्र का परभणी नगर निगम चुनाव सत्ताधारी गठबंधन के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है। उद्धव बालासाहेब ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) ने यहां शानदार प्रदर्शन करते हुए भाजपा की बढ़त को रोक दिया और ऐतिहासिक जीत हासिल की।
राज्य में महायुति की लहर के बीच परभणी नगर निगम (PMC) में शिवसेना (UBT) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। यह पहला मौका है जब उद्धव ठाकरे की पार्टी सीधे तौर पर परभणी नगर निगम की सत्ता में पहुंची है। इस जीत के साथ ही एनसीपी और कांग्रेस का लगभग दो दशकों से चला आ रहा वर्चस्व समाप्त हो गया।
सीटों का गणित
कड़े मुकाबले में शिवसेना (UBT) ने 25 सीटों पर जीत दर्ज की।
कांग्रेस को 12, भाजपा को 12, एनसीपी (अजित पवार) को 11 सीटें मिलीं।
इसके अलावा जन सुराज्य पार्टी ने 3, यशवंत सेना ने 1 और एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई।
शिवसेना (UBT) और कांग्रेस, अन्य दलों के समर्थन से मेयर पद पर दावा पेश कर सकती हैं। उल्लेखनीय है कि परभणी में शिवसेना ने आखिरी बार 2007 में मेयर पद जीता था, जब यह नगर परिषद थी। 2011 में नगर निगम बनने के बाद से सत्ता एनसीपी और फिर कांग्रेस के पास रही। करीब 19 साल बाद शिवसेना की यह वापसी सियासी तौर पर अहम मानी जा रही है।
लोकल लीडरशिप ने बदली बाजी
इस जीत का श्रेय परभणी के सांसद संजय जाधव और विधायक डॉ. राहुल पाटिल की संयुक्त नेतृत्व क्षमता को दिया जा रहा है। जहां भाजपा ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण और मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले जैसे बड़े नेताओं को 200 से अधिक रैलियों और बैठकों में उतारा, वहीं ठाकरे गुट ने लगभग पूरी तरह स्थानीय नेतृत्व और जमीनी पकड़ पर भरोसा किया।
शिवसेना (UBT) ने 48 सीटों पर चुनाव लड़ा और शेष सीटों पर कांग्रेस के साथ रणनीतिक ‘फ्रेंडली फाइट’ और गठबंधन बनाए रखा, जिससे एंटी-महायुति वोट बंटने से बच गया।
महायुति को झटका
महायुति के सहयोगी दल—भाजपा, शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी—राज्यस्तरीय माहौल को स्थानीय जीत में बदलने में नाकाम रहे। गार्डियन मंत्री मेघना बोर्डिकर और उद्योग मंत्री उदय सामंत के जोरदार प्रचार के बावजूद गठबंधन कुल मिलाकर 25 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर सका।
नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता मेघना बोर्डिकर ने कहा,
“जहां देवेंद्र फडणवीस का प्रभाव राज्य के अन्य हिस्सों में दिखा, वहीं परभणी में हम पीछे रह गए। हार के कारणों की गहराई से समीक्षा की जाएगी।”
उद्धव ठाकरे को मनोवैज्ञानिक बढ़त
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सांसद संजय जाधव का मजबूत स्थानीय जुड़ाव और क्षेत्रीय गर्व की भावना ने ठाकरे गुट को मजबूती दी। उद्धव ठाकरे के लिए यह जीत न केवल राजनीतिक बल्कि मनोवैज्ञानिक बढ़त भी मानी जा रही है, जो यह दर्शाती है कि उनके नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) अब भी कुछ क्षेत्रों में भाजपा-शिंदे-अजित पवार गठबंधन की संयुक्त ताकत को चुनौती देने में सक्षम है।
Author: Deepak Mittal








