नई दिल्ली: स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती के अवसर पर भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद को देश की प्रगति का नेतृत्व करने के लिए भारत के युवाओं पर अटूट विश्वास था। उन्होंने कहा कि आज के दौर में युवाओं को राजनीति में किसी भी तरह के शॉर्टकट से बचना चाहिए, क्योंकि राजनीति सौ मीटर की दौड़ नहीं, बल्कि एक लंबी मैराथन है।
नितिन नबीन ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का मानना था कि जब भी देश नई ऊंचाइयों को छुएगा, उसका नेतृत्व युवा शक्ति ही करेगी। उन्होंने कहा, “हमारे प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद जी को युवाओं की शक्ति और नेतृत्व क्षमता पर पूरा भरोसा था। आज यह स्वीकार करना होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देशभर के युवाओं को 2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण के लिए आगे आने की प्रेरणा दी है।”
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा केवल स्वामी विवेकानंद की जयंती मनाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उनसे प्रेरणा लेकर पूरे वर्ष कार्य करती है। भाजपा की युवा शाखा हर साल स्वामी विवेकानंद जयंती मनाकर उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का काम करती है।
राजनीति में आने के इच्छुक युवाओं को सलाह देते हुए नितिन नबीन ने कहा, “अगर आज के युवा राजनीति में आना चाहते हैं, तो उन्हें शॉर्टकट से बचना चाहिए। शॉर्टकट हमेशा परेशानी का कारण बनते हैं। राजनीति गति की नहीं, बल्कि धैर्य और सहनशक्ति की परीक्षा है।”
इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि वे भारत के युवाओं के लिए प्रेरणा का सशक्त स्रोत हैं। प्रधानमंत्री ने X पर लिखा कि स्वामी विवेकानंद का व्यक्तित्व और कार्य विकसित भारत के संकल्प को नई ऊर्जा देते हैं और राष्ट्रीय युवा दिवस का यह अवसर युवाओं में नई शक्ति और आत्मविश्वास का संचार करे।
वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनकी शिक्षाएं मानवता को सदैव प्रेरित करती रहेंगी। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने आंतरिक शक्ति, मानव सेवा और राष्ट्रीय गौरव का संदेश देकर युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित किया।
गौरतलब है कि हर वर्ष 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाई जाती है। युवा मामलों और खेल मंत्रालय के अनुसार, यह दिन युवाओं की क्षमता, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका को रेखांकित करने का अवसर है। स्वामी विवेकानंद, जिनका जन्म नरेंद्रनाथ दत्ता के रूप में हुआ था, 19वीं शताब्दी में हिंदू धर्म के पुनर्जागरण के प्रमुख स्तंभ रहे। 1893 में शिकागो के विश्व धर्म संसद में दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषण ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई और भारतीय दर्शन को विश्व पटल पर स्थापित किया।
Author: Deepak Mittal










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