Indian Railways News: भारतीय रेलवे ने वंदे भारत को लेकर एक बार फिर बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। प्रीमियम ट्रेन सेवाओं को और मजबूत करने के उद्देश्य से रेलवे ने वंदे भारत चेयर कार ट्रेन सेट के उत्पादन को दोबारा मंजूरी दे दी है। पहले जिस सेगमेंट का निर्माण रोका गया था, अब उसी पर रेलवे ने मेगा प्लान के तहत काम तेज करने का निर्णय लिया है।
रेलवे बोर्ड के मुताबिक, वर्ष 2026-27 से 2029-30 के बीच कुल 1500 वंदे भारत चेयर कार कोच बनाए जाएंगे। इससे देश की इंटरसिटी रेल सेवाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
चेन्नई की ICF को मिली बड़ी जिम्मेदारी
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत 720 कोच चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में तैयार किए जाएंगे। बाकी कोच देश की अन्य रेलवे कोच निर्माण इकाइयों में बनाए जाएंगे। इससे न सिर्फ स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रेलवे के उत्पादन ढांचे को भी नई मजबूती मिलेगी।
शताब्दी एक्सप्रेस की जगह लेंगी वंदे भारत ट्रेनें
रेलवे सूत्रों के अनुसार, जिन शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों के रेक का निर्माण लगभग बंद हो चुका है, उनकी जगह अब वंदे भारत चेयर कार ट्रेन सेट लेंगे। इस योजना के तहत कुल 88 नए रेक तैयार किए जाएंगे।
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68 रेक होंगे 16-कोच वाले
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20 रेक होंगे 20-कोच वाले
यानी आने वाले समय में शताब्दी की पहचान धीरे-धीरे वंदे भारत में बदलती नजर आएगी।
रफ्तार और सुविधाओं का नया अनुभव
वंदे भारत चेयर कार रेक को 160 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति के अनुसार डिजाइन किया गया है। ये ट्रेनें खास तौर पर दिन के समय चलने वाली इंटरसिटी सेवाओं के लिए होंगी, जिससे यात्रियों को कम समय में ज्यादा आरामदायक और आधुनिक सफर मिल सकेगा।
अब तक कितनी वंदे भारत चल रही हैं?
दिसंबर 2023 तक देश की तीन प्रमुख कोच निर्माण इकाइयों—
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ICF, चेन्नई
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RCF, कपूरथला
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MCF, रायबरेली
ने मिलकर करीब 96 वंदे भारत चेयर कार रेक तैयार किए थे। इनमें से 82 रेक विभिन्न रूटों पर सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं, जबकि कुछ रेक अभी अलग-अलग रेलवे जोनों को आवंटित किए गए हैं।
2019 में शुरू हुई थी वंदे भारत की रफ्तार
वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत 2019 में हुई थी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली–वाराणसी रूट पर पहली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई थी। आज यह ट्रेन करीब 8 घंटे में दूरी तय करती है। वर्तमान में देशभर में लगभग 164 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें अलग-अलग रूटों पर दौड़ रही हैं।
Author: Deepak Mittal










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