धान खरीदी में बड़ा खेल …….41.200 किलो तौल, बोरी सिलते ही 36 किलो बचा… तहसीलदार की छापेमारी में खुली किसानों से लूट की परतें

Picture of Deepak Mittal

Deepak Mittal

शिवराजपुर: सेवा सहकारी समिति शिवराजपुर के धान खरीदी केंद्र में लंबे समय से चल रही धांधली की शिकायतों ने आखिरकार प्रशासन का ध्यान खींच ही लिया। तहसीलदार प्रज्ञा दुबे ने थाना प्रभारी अजय अहिरवार (सिंहपुर) के साथ औचक निरीक्षण किया। लेकिन जो सच्चाई सामने आई, उसने न सिर्फ अधिकारियों को चौंकाया, बल्कि किसानों के साथ हो रही खुली धोखाधड़ी को भी बेनकाब कर दिया।

 कहां गायब हो गया 5 किलो धान?

निरीक्षण के दौरान जब किसानों से खरीदी जा रही धान की तौल कराई गई तो वजन 41 किलो 200 ग्राम पाया गया, जबकि शासन के नियमानुसार एक बोरी का मानक वजन 40 किलो 600 ग्राम तय है।
हैरानी तब और बढ़ गई जब उसी धान से भरी और सिली हुई बोरी को दोबारा तौला गया। वजन अचानक घटकर महज 36 किलो रह गया।

यानी एक ही बोरी में करीब 5 किलो धान रहस्यमय तरीके से गायब!
अधिकारियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था—आखिर ये धान गया कहां?

 नमी की आड़ में खेल?

जांच में यह भी सामने आया कि तौल के बाद धान की बोरियों को खुले में रखा जा रहा था, जिससे नमी का स्तर बढ़कर 19 पॉइंट तक पहुंच गया।
जबकि शासन द्वारा निर्धारित मानक नमी स्तर 17 पॉइंट है।

अधिक नमी न सिर्फ धान की गुणवत्ता खराब करती है, बल्कि आगे चलकर किसानों के भुगतान में कटौती और विवाद की वजह भी बनती है।

 निरीक्षण से पहले गायब हुए प्रबंधक

जब अधिकारी केंद्र पहुंचे, तब समिति के सहायक प्रबंधक हरिराम पांडेय मौके से नदारद मिले। उनकी अनुपस्थिति को अधिकारियों ने गंभीरता से लिया।
तहसीलदार प्रज्ञा दुबे ने पूरे मामले का पंचनामा तैयार कर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

 किसानों का आरोप – तौल में लूट, बोरियों में चोरी

स्थानीय किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि

  • पहले तौल के समय उनसे ज्यादा वजन लिया जाता है

  • बाद में मजदूरों के जरिए बोरियों से अतिरिक्त धान निकाल लिया जाता है

  • इस पूरे खेल से समिति को अवैध मुनाफा होता है, जबकि किसान हर बार घाटे में जाते हैं

 जल्द होगी कार्रवाई

तहसीलदार प्रज्ञा दुबे ने कहा कि

“धान खरीदी केंद्र में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। पंचनामा तैयार कर लिया गया है और जल्द ही विस्तृत प्रतिवेदन बनाकर सख्त कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।”

👉 सवाल अब भी कायम है—
क्या यह सिर्फ एक केंद्र की कहानी है, या पूरे सिस्टम में किसानों के हक पर इसी तरह डाका डाला जा रहा है?
जांच के नतीजों पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।

Deepak Mittal
Author: Deepak Mittal

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

October 2026
S M T W T F S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *