मनरेगा का अंत ‘सामूहिक नैतिक विफलता’, अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होने की अपील
नई दिल्ली: कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी ने केंद्र की मोदी सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को धीरे-धीरे खत्म करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने इसे “डेथ बाय थाउजेंड कट्स स्ट्रैटजी” यानी हजार छोटे-छोटे घाव देकर समाप्त करने की रणनीति करार दिया है।
अंग्रेजी दैनिक ‘द हिंदू’ में लिखे अपने लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा जैसी दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजना का कमजोर किया जाना केवल एक योजना का अंत नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक नैतिक विफलता है, जिसके दूरगामी और भयावह परिणाम करोड़ों गरीब मेहनतकशों को भुगतने पड़ेंगे।
बिना चर्चा के खत्म की जा रही योजना?
सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि बीते कुछ दिनों में मोदी सरकार ने चर्चा, परामर्श और संसदीय प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए मनरेगा को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना केवल एक प्रतीक है, असल में पूरी संरचना को ही नष्ट किया जा रहा है, जिससे यह योजना प्रभावी बनी थी।
राज्यों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने चेताया कि इससे पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे राज्यों की वित्तीय हालत और बदतर हो जाएगी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा के मांग आधारित और विकेंद्रीकृत स्वरूप को खत्म कर दिया है, जो इस योजना की आत्मा थी।
125 दिन रोजगार का दावा बताया भ्रामक
सोनिया गांधी ने सरकार के उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया है कि रोजगार की गारंटी को 100 से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक के रिकॉर्ड से साफ है कि सरकार लगातार मनरेगा का गला घोंटती रही है, चाहे वह बजट में कटौती हो, तकनीकी बाधाएं हों या मजदूरी भुगतान में देरी।
संविधान और अधिकारों पर हमला
अपने लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि मनरेगा को कमजोर करना केवल काम के अधिकार पर हमला नहीं है, बल्कि इसे संविधान और अधिकार-आधारित शासन व्यवस्था पर लंबे समय से चल रहे हमले के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अब तो मतदान जैसे बुनियादी अधिकार भी अभूतपूर्व दबाव में हैं।
एकजुट होने की अपील
सोनिया गांधी ने जोर देकर कहा,
“मनरेगा ने महात्मा गांधी के सर्वोदय के विचार को जमीन पर उतारा। इसका खत्म होना करोड़ों भारतीयों के लिए वित्तीय और मानवीय संकट लेकर आएगा।”
उन्होंने देशवासियों से अपील की कि अब पहले से कहीं ज्यादा जरूरी है कि हम एकजुट होकर उन अधिकारों की रक्षा करें, जो हम सबकी सुरक्षा करते हैं।
Author: Deepak Mittal










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