जिस जॉर्डन के दौरे पर पीएम मोदी, उसके पास है पूरे मिडिल ईस्ट की सबसे अनोखी ताकत

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 संतुलित विदेश नीति और रणनीतिक स्थिति ने जॉर्डन को बनाया पश्चिम एशिया का ‘साइलेंट पावर सेंटर’

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की चार दिवसीय विदेश यात्रा पर हैं। इस दौरे का उद्देश्य पश्चिम एशिया और अफ्रीका में भारत के रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करना है। बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक हालात, ऊर्जा संकट, व्यापारिक प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत का यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है।

सोमवार को पीएम मोदी जॉर्डन पहुंचे, जहां राजधानी अम्मान में उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। यहां उनकी मुलाकात किंग अब्दुल्लाह द्वितीय और प्रधानमंत्री जफर हसन से हुई। यह मुलाकात इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि जॉर्डन को पूरे मिडिल ईस्ट में एक बेहद अनोखी और संतुलित ताकत के रूप में देखा जाता है।

क्यों खास है जॉर्डन?

जॉर्डन की सबसे बड़ी ताकत उसकी संतुलित विदेश नीति है। जहां मिडिल ईस्ट के अधिकतर देश अमेरिका, सऊदी अरब या ईरान के खेमे में साफ तौर पर खड़े नजर आते हैं, वहीं जॉर्डन ने अरब देशों के साथ-साथ इजराइल और पश्चिमी देशों से भी मजबूत रिश्ते बनाए रखे हैं। यही वजह है कि जॉर्डन को क्षेत्रीय संतुलन साधने वाला देश माना जाता है।

‘साइलेंट ताकत’ कहलाता है जॉर्डन

जॉर्डन का हशेमाइट राजवंश करीब 1400 साल पुराना माना जाता है। किंग अब्दुल्लाह द्वितीय का परिवार पैगंबर मोहम्मद के वंश से जुड़ा बताया जाता है। हशेमाइट किंगडम ने फिलिस्तीन-इजराइल जैसे संवेदनशील मुद्दों पर मध्यस्थ की भूमिका निभाई है और क्षेत्रीय शांति का समर्थन करता रहा है। इसी कारण जॉर्डन को मिडिल ईस्ट की ‘साइलेंट लेकिन प्रभावशाली ताकत’ कहा जाता है।

रणनीतिक रूप से बेहद अहम देश

भौगोलिक रूप से जॉर्डन पश्चिम एशिया का एक अहम जियो-पॉलिटिकल हब है। इसकी सीमाएं इराक, सीरिया, इजराइल और फिलिस्तीनी क्षेत्रों से लगती हैं। ऐसे में जॉर्डन से मजबूत रिश्ते पूरे अरब क्षेत्र में भारत की पकड़ को और मजबूत कर सकते हैं।

75 साल की दोस्ती, 8-पॉइंट साझा विजन

पीएम मोदी का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और जॉर्डन अपने राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। इस दौरान दोनों देशों ने भविष्य की साझेदारी के लिए 8-पॉइंट साझा विजन रखा है, जिसमें—

  • व्यापार और आर्थिक सहयोग

  • उर्वरक और कृषि

  • सूचना प्रौद्योगिकी

  • स्वास्थ्य सेवाएं

  • बुनियादी ढांचा

  • क्रिटिकल और स्ट्रैटेजिक मिनरल्स

  • सिविल न्यूक्लियर कोऑपरेशन

  • लोगों के बीच संपर्क
    शामिल हैं।

भारत-जॉर्डन व्यापारिक रिश्ते

भारत और जॉर्डन के बीच पहले से मजबूत व्यापारिक संबंध हैं। भारत जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वित्त वर्ष 2023-24 में दोनों देशों के बीच व्यापार 2.875 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 25,858 करोड़ रुपये) रहा। भारत ने जॉर्डन को इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट्स, अनाज, केमिकल, पेट्रोलियम और ऑटो पार्ट्स का निर्यात किया, जबकि जॉर्डन से भारत को उर्वरक, फॉस्फेट और फॉस्फोरिक एसिड मिलता है। इसके अलावा कई भारतीय कंपनियां जॉर्डन में सक्रिय रूप से प्रोजेक्ट चला रही हैं।

रणनीतिक संदेश भी

विशेषज्ञों का मानना है कि जॉर्डन के साथ रिश्ते मजबूत कर भारत यह संदेश दे रहा है कि वह मिडिल ईस्ट में किसी एक धुरी पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि संतुलित और बहुआयामी साझेदारियों के जरिए अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाएगा।

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Author: Deepak Mittal

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