छत्तीसगढ़ में महिला विकास की नई इबारत,मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण बना सुशासन की पहचान

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Deepak Mittal

रायपुर।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने बीते दो वर्षों में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने की दिशा में राज्य सरकार ने महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और निर्णय क्षमता को नीतियों का केंद्र बनाते हुए सामाजिक-आर्थिक बदलाव की एक नई इबारत लिखी है। इन प्रयासों ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय पटल पर महिला विकास के एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित किया है।


महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित शासन की स्पष्ट सोच

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि राज्य सरकार का संकल्प है कि छत्तीसगढ़ की हर महिला आत्मनिर्भर, सुरक्षित और सम्मानित जीवन जिए। बीते दो वर्षों में महिला सशक्तिकरण को केंद्र में रखकर किए गए कार्य एक समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव हैं। सरकार आगे भी महिलाओं के स्वास्थ्य, सुरक्षा, आजीविका और भागीदारी को हर नीति का आधार बनाकर योजनाओं का विस्तार करती रहेगी।


महतारी वंदन योजना से आर्थिक मजबूती

राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना ने महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता को नई मजबूती दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 10 मार्च 2024 को वर्चुअली शुरू की गई इस योजना के तहत राज्य की लगभग 70 लाख विवाहित महिलाओं को हर माह 1,000 रुपये की प्रत्यक्ष सहायता दी जा रही है। अब तक 22 किश्तों में 14,306 करोड़ 33 लाख रुपये महिलाओं के खातों में अंतरित किए जा चुके हैं। महिलाओं के पोषण, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए 5,500 करोड़ रुपये का प्रावधान इस बात का प्रमाण है कि महिला कल्याण राज्य की विकास यात्रा का केंद्र बिंदु है।


संपत्ति अधिकार और संस्थागत सहयोग

महिलाओं को संपत्ति में अधिकार देने के लिए रजिस्ट्री शुल्क में 1 प्रतिशत की छूट जैसे निर्णयों ने उन्हें आर्थिक के साथ-साथ सामाजिक रूप से भी सशक्त बनाया है। इसके साथ ही 368 महतारी सदनों के निर्माण को स्वीकृति दी गई है, जहां प्रशिक्षण, परामर्श, कौशल विकास और सहायक सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी।
मितानिनों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय व प्रोत्साहन राशि का ऑनलाइन भुगतान शुरू कर सरकार ने पारदर्शिता और सुशासन को और मजबूत किया है।


स्व-सहायता समूहों से ग्रामीण महिलाओं को संबल

ग्रामीण और वंचित वर्ग की महिलाओं तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए स्व-सहायता समूहों को नए अवसर दिए गए हैं। बस्तर, दंतेवाड़ा, बलौदाबाजार, कोरबा, रायगढ़ और सूरजपुर में रेडी-टू-ईट का कार्य महिला समूहों को सौंपा गया है।
इसके अलावा 42,878 महिला समूहों को 12,946.65 लाख रुपये का रियायती ऋण प्रदान कर उन्हें आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाया गया है। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजनासिलाई मशीन सहायता और दीदी ई-रिक्शा योजना ने महिलाओं को आजीविका के नए साधन उपलब्ध कराए हैं। वहीं मिनीमाता महतारी जतन योजना गर्भवती श्रमिक महिलाओं को स्वास्थ्य, पोषण और आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार दे रही है।


कन्याओं, किशोरियों और महिला उद्यमिता पर विशेष फोकस

कन्याओं के विवाह में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना को और सशक्त करते हुए 50,000 रुपये की सहायता राशि में से 35,000 रुपये सीधे कन्या के खाते में जमा करने का निर्णय लिया गया है। वर्ष 2024-25 में 8,000 कन्याओं के विवाह के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
एनआरएलएम के तहत लखपति दीदी और ड्रोन दीदी जैसी पहलों के लिए 800 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जो महिला उद्यमिता के नए आयाम स्थापित कर रही हैं।


महिला सुरक्षा में ऐतिहासिक पहल

महिला सुरक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने कई अहम कदम उठाए हैं। नवाबिहान योजना घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को कानूनी, चिकित्सा और मनोसामाजिक सहायता प्रदान कर रही है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है जिसने सखी वन-स्टॉप सेंटर का डिजिटल संस्करण और मानक प्रक्रिया लागू की।
181 महिला हेल्पलाइन और डायल 112 के एकीकृत संचालन से संकट की स्थिति में त्वरित सहायता सुनिश्चित हुई है। वहीं सुखद सहारा योजना के तहत 2 लाख 18 हजार से अधिक विधवा और परित्यक्ता महिलाओं को प्रतिमाह 500 रुपये की सहायता दी जा रही है।


शिक्षा, स्वास्थ्य और बाजार से जुड़ाव

किशोरियों के स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए शुचिता योजना के तहत 2,000 स्कूलों में नैपकिन वेंडिंग मशीनें लगाई गई हैं और 3 लाख से अधिक किशोरियों को स्वच्छता सामग्री उपलब्ध कराई गई है। हाई स्कूल छात्राओं के लिए साइकिल वितरण हेतु 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
नवा रायपुर में 200 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यूनिटी मॉल महिला समूहों के उत्पादों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। जशपुर की आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित ‘जशप्योर’ ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयास भी महिलाओं के लिए नए अवसर खोल रहे हैं।


सरकार की प्राथमिकता: महिला कल्याण

महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने के साथ-साथ उनके लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है। महतारी वंदन, नवाबिहान, लखपति दीदी, शुचिता और महतारी सदन जैसी योजनाएं महिलाओं के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं।


महिला कल्याण को मिला मजबूत बजट

महिला एवं बाल विकास विभाग को वर्ष 2025-26 में 8,245 करोड़ रुपये का बजट देकर सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि महिला कल्याण और सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हुए ये परिवर्तन इस बात का प्रमाण हैं कि महिलाओं को केंद्र में रखकर किया गया विकास ही एक प्रगतिशील और समावेशी समाज की आधारशिला है
आज छत्तीसगढ़ महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नई दिशा, नई उम्मीद और नए परिवर्तन का प्रतीक बनकर उभर रहा है।

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Author: Deepak Mittal

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