लोरमी में गुरु तेग बहादुर साहिब जी की शहादत यात्रा का भव्य स्वागत, सिख समाज ने फूलों से सजाई सड़कें

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निर्मल अग्रवाल ब्यूरो प्रमुख मुंगेली 8959931111

लोरमी-सिख धर्म के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर साहिब जी की 350वीं शहीदी शताब्दी के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ सिख संगठन द्वारा निकाली गई शहादत यात्रा आज लोरमी पहुंची। स्थानीय सिख समाज ने यात्रा का अत्यंत भव्य और भावपूर्ण स्वागत किया, जो गुरु साहिब के बलिदान की अमर गाथा को समर्पित है।

रायपुर से प्रारंभ हुई यह यात्रा सिख समाज के गौरवशाली इतिहास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। पूरे भारत में सिख समुदाय का इतिहास हमेशा से देशभक्ति और सेवा का प्रतीक रहा है। मुगल काल से लेकर अंग्रेजी शासन, 1965-71 के युद्धों, पड़ोसी देशों के छद्म हमलों और कोरोना महामारी के दौरान की सेवा कार्यों में सिख समाज ने हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है, भले ही देश की कुल आबादी में उनका प्रतिशत मात्र 2% हो।

गुरु तेग बहादुर साहिब जी ने कश्मीरी पंडितों की पुकार पर धर्म, तिलक-जनेऊ की रक्षा के लिए अत्याचारी मुगल बादशाह औरंगजेब की नीतियों का डटकर मुकाबला किया। परिणामस्वरूप, दिल्ली लाए गए गुरु साहिब को उनके तीन वफादार साथी भाई सती दास, भाई मति दास और भाई दयाला जी सहित सैकड़ों अनुयायियों के साथ गिरफ्तार किया गया।

चांदनी चौक में सैकड़ों शिष्यों को शहीद करने के बाद, भाई सती दास जी को आरी से चीर दिया गया, भाई मति दास जी को जीवित जला दिया गया और भाई दयाला जी को उबाल कर मार डाला गया। अंत में, गुरु साहिब का शीश धड़ से अलग कर दिया गया। आज दिल्ली के चांदनी चौक में शीश गंज और रकाब गंज गुरुद्वारा इन शहीद स्थलों की साक्षी खड़े हैं।

इस पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ सिख समाज द्वारा रायपुर से निकाली गई शहादत यात्रा आज लोरमी पहुंची, जहां लोरमी सिख समाज ने उनका हार्दिक स्वागत किया। पंज प्यारों की अगुवाई में शबद कीर्तन करते हुए नगर कीर्तन निकाला गया। सड़कों पर फूल बिछाकर यात्रा का स्वागत किया गया, जो आस्था और श्रद्धा का अनुपम दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। कीर्तन का समापन लोरमी गुरुद्वारा में हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने गुरु ग्रंथ साहिब जी के दर्शन किए।

गुरुद्वारा परिसर में आयोजित सभा में सिख समाज के मीडिया प्रभारी आकाश सलूजा ने मंच संचालन किया। रायपुर से आए इंदरपाल सिंह अजमानी ने यात्रा के उद्देश्य, मार्ग और महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा गुरु साहिब के बलिदान की याद दिलाती है और धार्मिक स्वतंत्रता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बनेगी।

सिख समाज के अध्यक्ष अनिल सलूजा ने सभी सहयोगियों, यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि गुरु साहिब का बलिदान आज भी हमें एकता, साहस और मानवता की सेवा का संदेश देता है।यात्रा मर शामिल रायपुर से आये इंद्रजीत सिंह छाबड़ा,कुलदीप सिंह चावला,सतपाल सिंह खनूजा,इंदरपाल सिंह अजमानी,आशीष सिंह खनूजा,अर्श सिंह,रायपुर से आये ग्रंथी जी वही लोरमी सिख समाज के प्रधान अनिल सलूजा,मंजीत सलूजा, शैलेंद्र सलूजा,आकाश मोंटी सलूजा,रिक्की सलूजा,गुरमीत सलूजा,अमित सलूजा,रितेश सलूजा,बबलू छाबड़ा बंटी छाबड़ा पप्पू छाबड़ा, इंद्रजीत छाबड़ा,पप्पू सलूजा राजू सलूजा पिंटू उपवेजा रितु छाबड़ा बंटी उपवेजा राजू उपवेजा अशोक सलूजा रंजीत सलूजा, मिंटू छाबड़ा,राम छाबड़ा,रानू राहुल साहनी राजवीर बग्गा देवेंद्र सलूजा आशुतोष सलूजा विकास सलूजा नवीन सलूजा,गगन सलूजा,अमन सलूजा,शुभम सलूजा, सनी सलूजा शैम्पी सलूजा, रौनक सलूजा पवन सलूजा,सागर सलूजा सिद्धार्थ छाबड़ा राज सलूजा एवं बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुई..

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