RTI पर भी ‘पर्दादारी’ क्यों? घरघोड़ा PHE में पारदर्शिता की जगह अंधेरा, अफसरों का टालमटोल जारी…

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शैलेश शर्मा 9406308437नवभारत टाइम्स 24×7.in जिला ब्यूरो रायगढ़

रायगढ़। सूचना का अधिकार अधिनियम लागू हुए दो दशक से अधिक समय हो चुका है। यह कानून नागरिकों को पारदर्शिता और जवाबदेही का अधिकार देता है। लेकिन घरघोड़ा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) उपखंड के अफसर इस कानून को ठेंगा दिखाते नज़र आ रहे हैं।

पत्रकार शैलेश शर्मा ने विभागीय कार्यों से जुड़ी जानकारी RTI के माध्यम से मांगी थी। पहले तो विभाग ने चुप्पी साध ली, बाद में “जानकारी स्पष्ट नहीं” का बहाना बनाकर जवाब टाल दिया। आखिरकार अपीलीय अधिकारी ने आदेश दिया कि आवेदक को 1 अगस्त 2025 को घरघोड़ा उपखंड कार्यालय में दस्तावेज़ों का अवलोकन कराया जाए और मांगी गई सूचना निशुल्क उपलब्ध कराई जाए।

लेकिन नतीजा क्या हुआ?

  • आदेश के बाद भी सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।
  • अवलोकन का ढोंग रचा गया, लेकिन फाइलें बंद ही रहीं।
  • जनसूचना अधिकारी और जिम्मेदार अफसरों ने चुप्पी साध ली।

आखिर छुपाना क्या चाहते हैं अधिकारी? – जब RTI अधिनियम साफ कहता है कि मांगी गई जानकारी 30 दिनों के भीतर देना अनिवार्य है, तब भी घरघोड़ा PHE विभाग टालमटोल क्यों कर रहा है? सवाल यह उठता है कि-

  • क्या विभागीय गड़बड़झाले और भ्रष्टाचार छुपाने की कोशिश हो रही है?
  • क्या ठेकेदारों-माफियाओं के साथ किसी सांठगांठ को ढकने का प्रयास है?
  • या फिर पत्रकार को डराने और थकाने की सुनियोजित रणनीति अपनाई जा रही है?

यह सिर्फ लापरवाही नहीं, लोकतंत्र का अपमान : सूचना छुपाना केवल अफसरशाही की मनमानी नहीं है, बल्कि यह RTI कानून का खुला उल्लंघन और जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है। अपीलीय आदेश की अनदेखी करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

जनता का सीधा सवाल – “सच से क्यों भाग रहे हो साहब?”

घरघोड़ा PHE अफसरों का यह रवैया अब आम लोगों में संदेह और आक्रोश पैदा कर रहा है। जनहित से जुड़ी सूचना दबाकर आखिर अधिकारी किसकी रक्षा कर रहे हैं और किस कीमत पर लोकतंत्र को बेच रहे हैं?

RTI से भागते अफसरों की यह ‘पर्दादारी’ अब सवालों से ज्यादा गंधाने लगी है। जनता को जवाब चाहिए – और तुरंत चाहिए।

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Author: Deepak Mittal

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