पंजाब में बाढ़ से हाहाकार मचा हुआ है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से लगते जिलों में हालात काफी खराब हैं और कई गांव पूरी तरह पानी में डूबे हुए हैं। यहां रहने वाले लोग फिलहाल अस्थायी कैंपों में रहने के लिए मजबूर हैं।
कोई आलीशान कोठी छोड़कर भागने को मजबूर हुआ है तो किसी को अपने पशुओं तक को निकालने का वक्त नहीं मिला। पंजाब के लोगों का कहना है कि 1988 के बाद पहली बार इतनी भीषण बाढ़ राज्य में आई है, यानी 37 सालों का रिकॉर्ड टूट गया है। हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में चल रही भारी बारिश के कारण सतलुज, ब्यास और रावी नदियों का पानी उफान पर है।
आसपास में काफी दूरी तक रिहायशी इलाकों में इन नदियों का पानी चला आया है। कुछ इलाकों में तो ऐसी स्थिति है कि जहां तक नजर जाती है, वहां तक सिर्फ पानी ही दिख रहा है। खासतौर पर पठानकोट, गुरदासपुर, फाजिल्का, तरन तारन, कपूरथला, फिरोजपुर, होशियारपुर और अमृतसर में हालात खराब हैं। निचले इलाके में पड़ने वाले सैकड़ों गांव पूरी तरह जलमग्न हैं। दूर से देखने पर घरों का थोड़ा हिस्सा ही दिखता है क्योंकि ज्यादातर पानी में डूब चुके हैं। इससे हजारों लोगों को पलायन करना पड़ा है तो वहीं जान और माल की हानि भी बड़े पैमाने पर हुई है।
फिलहाल राहत एवं बचाव कार्य जारी है, लेकिन पहाड़ से लेकर मैदान तक लगातार जारी बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। चीफ मिनिस्टर भगवंत मान ने सभी प्रभावित जिलों में प्रशासन को आदेश दिया है कि बचाव कार्य में तेजी लाएं। आज वह चंडीगढ़ में एक हाई लेवल मीटिंग भी इस बारे में करने वाले हैं। राजपुरा में फ्लड कंट्रोल रूम बनाया गया है। इसके अलावा इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है।
पटियाला में बाढ़ का एक लंबा इतिहास रहा है। 1993 में भी इस जिले में भीषण बाढ़ आई थी। इसके अलावा दो साल पहले 2023 में भी बाढ़ आई थी। जिले में तमाम गांवों को बड़ा नुकसान मॉनसून से आई बाढ़ के चलते हुआ था। पंजाब के लिए बड़े पैमाने पर प्रवासी भारतीयों ने भी मदद का हाथ बढ़ाया है। सोशल मीडिया पर #PrayforPunjab ट्रेंड कर रहा है।

Author: Deepak Mittal
