दल्लीराजहरा।,शासन की बहुप्रचारित सरस्वती सायकल योजना का लाभ दल्लीराजहरा शहर सहित आसपास के आदिवासी बाहुल्य विकासखंडों की छात्राओं को अब तक नहीं मिल सका है। स्कूल खुलने के दो महीने बीत जाने के बाद भी हज़ार से अधिक छात्राएं आज तक सायकल से वंचित हैं।
सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत हर साल 9वीं कक्षा में प्रवेश लेने वाली छात्राओं को मुफ्त सायकल प्रदान की जाती है, जिससे वे शिक्षा की राह में सुगमता से सफर तय कर सकें। लेकिन हकीकत में यह योजना शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण मज़ाक बनकर रह गई है।

ग्रामीण इलाकों की छात्राएं आज भी 5 से 8 किलोमीटर तक पैदल चलकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं, और कोई सुनवाई नहीं हो रही है। कई छात्राओं ने बताया कि कई बार प्रधानपाठक, विकासखंड शिक्षा अधिकारी और जिला कार्यालय तक गुहार लगाई, लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उदासीनता ने बेटियों को इस योजना के लाभ से कोसों दूर कर दिया है। न सायकल की आपूर्ति हुई, न वितरण की कोई तिथि तय है। शिक्षा विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है
क्या आदिवासी बेटियों की तकलीफ किसी को नहीं दिख रही?
क्या योजनाओं का फायदा सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेगा?
यह मामला ना सिर्फ़ सिस्टम की सुस्ती को उजागर करता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि शासन की योजनाएं जमीनी हकीकत से कितनी दूर हैं।

सरस्वती साइकिल योजना छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई एक योजना है, जिसका उद्देश्य राज्य में बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना और स्कूल छोड़ने की दर को कम करना है। इस योजना के तहत, 14-18 आयु वर्ग की बालिकाओं को मुफ्त साइकिलें प्रदान की जाती हैं, जिससे उन्हें स्कूल जाने में आसानी हो।
जिला शिक्षा अधिकारी श्री मरकले कहते हैं कि शीघ्र ही सरस्वती साइकिल योजना के अंतर्गत पात्रता रखने वाले छात्राओं को साइकिल वितरण किया जाना है शासन स्तर से आ
सायकल पहुंचने वाली है,!
Author: Deepak Mittal









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