योग से मधुमेह पर नियंत्रण: प्राचीन पद्धति की आधुनिक प्रासंगिकता

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तेजी से बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और तनावपूर्ण दिनचर्या के चलते मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह न केवल एक स्वास्थ्य समस्या है, बल्कि एक वैश्विक चिंता का विषय बन चुका है।

मधुमेह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में रक्त शर्करा का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है। ऐसा तब होता है जब शरीर में इंसुलिन हार्मोन की कमी हो जाती है या वह ठीक से कार्य नहीं कर पाता।

इसी संदर्भ में, योग को एक प्रभावी सहायक चिकित्सा पद्धति के रूप में देखा जा रहा है। योग न केवल शारीरिक संतुलन स्थापित करता है, बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करता है जो मधुमेह बढ़ने का एक प्रमुख कारण माना जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित रूप से कपालभाति प्राणायाम, वज्रासन, धनुरासन, और अर्ध मत्स्येन्द्रासन जैसे योगाभ्यास करने से ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है। इन अभ्यासों से शरीर की इंसुलिन संवेदनशीलता में सुधार होता है, और पाचन क्रिया भी मजबूत होती है।

“हर दिन 30 से 45 मिनट का योगाभ्यास न केवल मधुमेह नियंत्रण में सहायक है, बल्कि यह शरीर के संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी मदद करता है।”

भारत सरकार और आयुष मंत्रालय भी योग को मधुमेह जैसे जीवनशैली रोगों के लिए लाभकारी मानते हुए समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाते रहे हैं।

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Author: Deepak Mittal

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