सम्मेलन में नगरीय निकायों से सम्बंधित विषयों को प्रमुखता से रखा
लोकसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री हरियाणा, केंद्रीय मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष हरियाणा की रही गरिमामयी उपस्थिति
निर्मल अग्रवाल ब्यूरो प्रमुख मुंगेली 8959931111
सरगांव- राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शहरी स्थानीय निकायों के अध्यक्षों का प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन
3 व 4 जुलाई 2025 हरियाणा के मानेसर, गुरुग्राम में आयोजित हुआ जंहा लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला के मुख्य आतिथ्य में विधिवत उद्घाटन पश्चात सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर सम्मेलन में मुख्य रूप से श्री ओम बिरला अध्यक्ष लोकसभा, श्री नायब सिंह सैनी मुख्यमंत्री हरियाणा, श्री मनोहर लाल केंद्रीय मंत्री आवास एवं शहरी कार्य तथा ऊर्जा भारत सरकार, श्री हरविंदर कल्याण अध्यक्ष हरियाणा विधानसभा उपस्थित रहे।
नगर पंचायत सरगांव के लिए यह सम्मेलन गौरवान्वित करने वाला रहा इस सम्मेलन में नगर पंचायत अध्यक्ष परमानन्द साहू भी शमिल हुए जंहा उन्होंने समस्त अथितियों की उपस्थिति में नगरीय निकायों से सम्बंधित विभिन्न विषयों पे अपनी बात प्रमुखता से रखी जिसकी सभी ने सराहना की।

सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को सम्बोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा की
“स्थानीय स्वशासन लोकतंत्र का मजबूत आधार है, इसके प्रतिनिधियों से जनता का सीधा संवाद होता है, जिससे आमजन लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्यक्ष भागीदार बनता है। लोकतंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इसमें जमीनी स्तर पर लोगों की कठिनाइयों और जरूरतों को समझते हुए नीतियाँ बनाने का अवसर मिलता है; और जब नीतियाँ जनभागीदारी से बनती हैं, तभी उनका लाभ व्यापक रूप से मिल पाता है।
भारत “मदर ऑफ डेमोक्रेसी” है। यहां ग्राम सभाओं, समितियों और जनचर्चा की समृद्ध परंपरा रही है। इन सभाओं में संवाद के माध्यम से जो निर्णय लिए जाते थे, उन्हें समाज ने हमेशा स्वीकारा। यही हमारी लोकतांत्रिक कार्यशैली की जड़ें हैं, जो हमें सदियों से मिली हैं।

आज आवश्यकता है कि नगर निकायों की बैठकें हमारी समृद्ध लोकतांत्रिक परम्परा को आगे बढ़ाएं। नगर निकायों की बैठकों का संचालन मर्यादित और नियमबद्ध हो, नियमित हो। उनमें प्रश्नकाल और शून्यकाल का प्रावधान हो, ताकि जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के मुद्दे उठा सकें। कार्यपालिका की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके, पारदर्शिता लाई जा सके और प्रशासनिक कार्यों की प्रभावी निगरानी हो।
मैंने देखा है कि कई नगर पालिकाओं, परिषदों और निगमों में साल भर तक बैठकें नहीं होतीं। कभी-कभी केवल बजट बैठक होती है, वो भी मात्र आधे घंटे में हंगामे के साथ स्थगित हो जाती है। यह लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा नहीं है।

बैठकें दिनभर चलें, हर प्रस्ताव और योजना पर गंभीर विचार हो। एजेंडा पहले से तैयार हो और अगली बैठक में उसकी कार्यवाही की समीक्षा हो कि उसके क्या परिणाम निकले। बजट पर भी व्यापक चर्चा हो, ताकि जनता के हित में योजनाएं बनें और उनका प्रभाव धरातल पर दिखे।
लोकतंत्र तभी सशक्त होगा जब संवाद, भागीदारी और जवाबदेही की परम्परा हर स्तर पर कायम रहेगी।
न.प. अध्यक्ष ने इन विषयों को सम्मेलन में रखा

1. सीमित वित्तीय संसाधन और आत्मनिर्भरता की कमी
ज्यादातर नगरीय निकाय सरकारी अनुदान पर निर्भर हैं। स्ववित्तीय संसाधन (जैसे संपत्ति कर, व्यावसायिक कर) सीमित हैं या वसूली व्यवस्था कमजोर है। इससे विकास कार्य रुक जाते हैं।
2. प्रशिक्षित मानव संसाधन की कमी

छोटे और मध्यम नगर निकायों में तकनीकी, लेखा और प्रशासनिक कर्मचारियों की भारी कमी है। इससे योजनाओं का क्रियान्वयन और पारदर्शिता प्रभावित होती है।
3. ठोस कचरा प्रबंधन की व्यवस्था कमजोर
आज भी कई नगरों में डंपिंग ग्राउंड, रीसायक्लिंग प्लांट और कचरा छंटाई प्रणाली उपलब्ध नहीं है। गली-मोहल्लों में कचरा फैलता है, जिससे स्वच्छता रैंकिंग और जनस्वास्थ्य प्रभावित होता है।
4. योजनाओं का केंद्रीकृत क्रियान्वयन और स्थानीय जरूरतों की अनदेखी
कई राष्ट्रीय योजनाएं स्थानीय ज़रूरतों और भूगोल के अनुसार अनुकूलित नहीं होतीं, जिससे योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाता।
5. जनसुनवाई और नागरिक सहभागिता की कमी
नगरीय शासन में नागरिकों की भागीदारी सीमित है। वार्ड समितियाँ, मोहल्ला सभा जैसी व्यवस्थाएं कागज़ों में ही हैं, जिससे नीतियाँ ज़मीनी हकीकत से दूर रह जाती हैं।
6. शहरी नियोजन और अवैध कॉलोनियों का बढ़ता बोझ
तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बावजूद योजना बद्ध विकास नहीं हो रहा। अवैध कॉलोनियां, ट्रैफिक समस्या, जलभराव और जलसंकट आम हो गए हैं।
न.प.अध्यक्ष परमानन्द साहू ने कहा कि-
“सम्मेलन के प्रथम दिवस में सहभागिता करने का अवसर मिला है यह मंच न केवल देश भर के जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद का माध्यम है बल्कि स्थानीय विकास के विजन को साझा करने का एक सशक्त अवसर भी है उपस्थित सम्मानित अतिथियों का मार्गदर्शन अत्यंत प्रेरणादायक रहा है सम्मेलन में सहभागी सभी प्रतिनिधियों के साथ संवाद एवं अनुभव साझा कर बहुत कुछ सीखने को मिला सम्मेलन में मिले मार्गदर्शन पश्चात निश्चित ही हम नगर पंचायत सरगांव के विकास को और सुदृढ़ करेंगे।”

Author: Deepak Mittal
