दल्लीराजहरा,,पत्तल की जगह अब थर्मोकोल की प्लेट ने जगह लिया, बढ़ने लगी बेरोजगारी,दल्लीराजहरा सहित क्षेत्र में अब प्राचीन परंपरा लुप्त होने लगी है अधिकांश शादी -विवाह एवं पार्टियों में देखा गया है की भोजन के समय बफे सिस्टम कर दिया गया है पत्तल की जगह स्टील प्लेट ,फाइबर और थर्मोकोल की प्लेट ने जगह ले ली है जिसे लेकर पत्तल का कार्य करने वाले लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें स्पष्ट दिख रही है आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र विकास खंड के विभिन्न ग्रामों में आज भी पत्तल का ही चलन है परंतु धीरे-धीरे पत्तल की प्राचीन परंपरा लुप्त होते जा रही है और उसकी जगह थर्माकोल ने ले लिया है थर्मोकोल की प्लेट आ जाने से जहां पत्तल बनाने वाले लोग थे अभी बेरोजगार होने लगे हैं दर्जनों सहायता समूह पत्तल बनाने के कार्य में ब्लाक क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं ब्लाक के विभिन्न ग्राम जैसे कि कुसुमकसा धोबनी अ, धोबनी ब, भर्रीटोला 43, रजही, चिपरा, ध्रुवाटोला, सुवरबोड़, दानीटोला, भैंसबोड़, गुजरा, खल्लारी,, चिखली, साल्हे, सिंघनवाही, टेकाढोड़ा, चिखलाकसा, धोबेदण्ड, बिटाल, अरमुरकसा सहित अंचल में पत्तल की मांग पहले से कम है सभी प्रकार के समूह आज बेरोजगार होने की स्थिति में हैं
कार्यक्रम, पॅनगत में पत्त्ल में खिलाडियों की परिपाटी थी बैठक खाने के क्षेत्र की परंपरा का विशेष हिस्सा है।आज के समय में आधुनिकता की चमक बरकरार है। अब थर्माकोल और प्लास्टिक ने जगह ले लिया है पत्ते से बनते पल्तल को उसकी जगह से धीरे- लुपत होने लगे है लोगो का कहना है कि इसके पूर्व ग्रामीणों द्वारा विभिन्न वनस्पतियों के पत्ते से पत्तल तैयार कर शहरों में बेचकर अपने परिवार की आजीविका चलाई लेकिन अब प्लास्टिक की पत्तलों के कारण उनका व्यवसाय पूरी तरह से ठप्प हो गया है, इससे उन्हें खाने के लाले पड़े हुए हैं
Author: Deepak Mittal










Total Users : 8168539
Total views : 8196238